रायपुर, राजधानी के मित्तल हॉस्पिटल में जिंदा व्यक्ति को मृत बताने का मामला सामने आया था, जिसकी जांच के लिए सीएमएचओ ने चार सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है। इस टीम में डॉ. संजीव वोहरा, डॉ. विनाश चतुर्वेदी, डॉ. श्वेता सोनवानी और सनत कुमार पटेल शामिल हैं। बता दें कि इस मामले को मीडिया ने प्रमुखता से उठाया था, जिस पर सीएमएचओ ने संज्ञान लिया है।
सीएमएचओ ने मामले की जांच कर तीन दिन के भीतर रिपोर्ट मांगा है। बता दें कि लोधीपारा चौक स्थित मित्तल हास्पीटल पर आरोप है कि जीवित व्यक्ति को मृत बताकर बॉडी परिजनों को सौंपा दिया था। अंतिम संस्कार के लिए ले जाने के दौरान एंबुलेंस में अचानक मृतक का हाथ पैर हिलने लगा था। इसके बाद उसे पानी पिलाया गया फिर मेकाहारा अस्पताल में भर्ती किया गया था, जहां इलाज के दौरान मरीज की मौत हो गई थी। मृतक के परिजनों ने मित्तल हॉस्पिटल को मौत के लिए जिम्मेदार बताया है।
पुरानी भिलाई के देवबलोदा निवासी रामअवतार रात्रे 3 जून को घर के बाथरूम में गिर गया था। गंभीर हालत में उसे मित्तल हास्पीटल लाया गया। डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि युवक की पसली टूट गई है और उसकी हालत काफी गंभीर है। उपचार के दौरान डॉक्टरों ने युवक को मृत घोषित कर दिया। परिजन शव को अंतिम संस्कार के लिए एंबुलेंस में रखकर अस्पताल से बाहर निकल रहे थे।
इसी दौरान अचानक मृत घोषित युवक के शरीर में हरकत शुरू हो गई। उसने हाथ-पैर हिलाने शुरू कर दिए। परिजनों ने तुरंत युवक को पानी पिलाया और बेहतर इलाज के लिए उसे रायपुर के मेकाहारा लाया। घटना के दौरान परिजनों ने पूरा घटनाक्रम अपने मोबाइल फोन से रिकॉर्ड भी किया है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ।
इस घटना को लेकर वायरल वीडियो में परिजन नाराजगी जता रहे हैं। उन्होंने कहा, ये कैसा अस्पताल है, जिसने जिंदा आदमी को मृत बता दिया? डॉक्टरों को ऐसा नहीं करना चाहिए था। अस्पताल पर कार्रवाई होनी चाहिए। मरीज के परिजनों ने बताया कि मेकाहारा अस्पताल में इलाज के दौरान युवक की मौत हुई है। मित्तल हॉस्पिटल में सही इलाज होता तो उनकी जान बच सकती थी।







