नारायणपुर, नशामुक्ति के नारों के साथ चलाए जा रहे अभियानों ने आदिवासी इलाकों में न केवल नशे की लत के खिलाफ माहौल बनाया है, बल्कि स्थानीय समुदायों को स्वयं के विकास के लिए आगे आने के लिए सशक्त भी किया है। बस्तर अंचल के आदिवासी इलाके के नारायणपुर जिले में कृषि महाविद्यालय नारायणपुर की अधिष्ठाता डॉ. रत्ना नशीने और स्थानीय स्वयंसेवकों के नेतृत्व में चलाए जा रहे नशा मुक्ति अभियान का व्यापक असर देखने को मिल रहा है। ग्रामीण युवा, महिलाएं और छात्र सक्रिय रूप से शामिल हो रहे है ।
अभियान के तहतआयोजित कार्यक्रमों में वितरित किए गए 5000 से ज्यादा पाम्पलेट और पोस्टर ने नशे के दुष्प्रभावों का संदेश हर घर तक पहुँचाया है। जागरूकता सत्र और इंटरेक्टिव गतिविधियों से आदिवासी युवाओं ने खुद निर्णय लिया कि वे अब नशे से दूर रहेंगे।स्वयंसेवकों की मदद से अभियान हर गाँव तक पहुँचा और ग्रामीणों और परिवारों में नशा मुक्त जीवन की आवश्यकता को समझाया गया। स्थानीय प्रशासन ने भी इस पहल की सराहना की।
विशेष रूप से “नशा नहीं, जीवन चुनो”’स्वस्थ तन, स्वस्थ मन- नशा मुक्त जीवन’, नशे की दावत, मौत की दावत””बाप शराब पिए, बच्चे भूखे मरे” “नशा मुक्त हो जीवन सारा, सुख-समृद्धि हो उजियारा”जैसे नारों का ग्रामीण समुदाय में व्यापक प्रभाव पडा हैं। ग्रामीणों का मानना है कि ऐसे नियमित अभियान से नशा मुक्त समाज का सपना जल्द साकार होगा।







