मुंबई , मुंबई के प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर में दान-पुण्य के पैसों और जेवरात में हुई कथित धांधली के मामले में एक बड़ा प्रशासनिक मोड़ आया है. डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सिद्धिविनायक मंदिर के पिछले 5 वर्षों के दौरान दान पेटी में आए पूरे रुपये-पैसे और चढ़ावे में मिले सोने-चांदी के जेवरात का स्पेशल ऑडिट कराने का आधिकारिक आदेश दे दिया है. इस मामले में News18 India की खबर का बड़ा असर देखने को मिला है. सबसे पहले हमने मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान में हो रहे घोटाले की परतें खोली गई थीं और मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया था. खबर का संज्ञान लेते हुए महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने एक्शन मोड में आते हुए कड़ा रुख अपनाया है. जांच के आदेश जारी होते ही मंदिर प्रशासन और संबंधित महकमे में हड़कंप मच गया है. सरकार के इस कदम के बाद अब दान चोरी और हेराफेरी में शामिल अधिकारियों व कर्मचारियों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है.
क्या था पूरा विवाद?
सिद्धिविनायक मंदिर में दान चोरी का यह पूरा मामला तब गरमाया जब महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के प्रमुख राज ठाकरे ने आरोप लगाया कि मंदिर के दान पात्र से हर साल लगभग 18 करोड़ रुपये की हेराफेरी और चोरी की जा रही है. उन्होंने इस संबंध में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को एक पत्र लिखे जाने का भी दावा किया था. हालांकि, सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया. ट्रस्ट के अध्यक्ष सदा सरवणकर और ट्रस्टी राहुल लोंढे के अनुसार, मई में ट्रस्ट ने खुद ही कानून एवं न्याय विभाग को पत्र लिखकर पिछले 5 सालों के दान का विस्तृत ऑडिट कराने की मांग की थी. ट्रस्ट का कहना है कि गड़बड़ी की जानकारी मिलते ही उन्होंने सबसे पहले भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) के प्रमुख विश्वास नांगरे पाटिल से शिकायत की थी, जिसके बाद मंदिर में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई.
मार्च महीने में दान पेटी से पैसे गायब होने की घटना सामने आई थी. सीसीटीवी फुटेज की जांच में कुछ कर्मचारी छोटी दान पेटी से नकदी निकालते पकड़े गए थे. दादर पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर 8 लोगों को गिरफ्तार किया था और चार्जशीट दाखिल की थी. फिलहाल सभी आरोपी जमानत पर बाहर हैं.







