FILM; आनंद, कभी मरा नहीं  करते……

पचपन साल पहले ऋषिकेश मुखर्जी ने एक ऐसी फिल्म बनाई थी जो जीवन दर्शन के हिसाब से लोगों को हौसला देने का काम कर गई। इस दुनियां में  बहुत से व्यक्ति जीवन में कभी न कभी ऐसी बीमारी से ग्रस्त हो जाते है जिसका परिणाम कष्ट और अंततः मृत्यु होती है। कैंसर एक  लाइलाज बीमारी है जिसमें उपचार के जरिए जिंदगी को विस्तार तो दिया जा सकता है लेकिन  जीवन की आयु सिमट जाती है। आनंद एक ऐसे युवक की कहानी का चित्रण है जिसे कैंसर की बीमारी होती है और जब वह इलाज के लिए पहुंचता है तो उसके पास केवल छः महीने जिंदगी शेष होती है। “जिंदगी लंबी नहीं बड़ी होनी चाहिए” के आदर्श को लेकर ऋषिकेश मुखर्जी ने अविस्मरणीय हृदयस्पर्शी  फिल्म “आनंद”  का निर्माण किया था।। ऋषिकेश मुखर्जी आनंद की भूमिका के लिए राज कपूर को ध्यान में रखा था।राज कपूर बीमार थे सो आनंद की भूमिका के लिए किशोर कुमार, शशि कपूर,से ऋषिकेश मुखर्जी ने संपर्क किया।राजेश खन्ना को जब ये बात पता चली तो वो गुलजार के जरिए ऋषिकेश मुखर्जी से मिले। राजेश खन्ना,  बड़े स्टार थे।एक फिल्म का आठ लाख रुपए लेते थे। ऋषिकेश मुखर्जी ने सिर्फ एक लाख रूपये और टाइम पर आने की शर्त रखी। राजेश खन्ना तुरंत मान गए। मगर 28 दिन में तीस लाख रुपए की बजट में आनंद फिल्म बन गई। इस फिल्म की जान राजेश खन्ना का बेमिसाल अभिनय था ही साथ में  गुलज़ार के
अर्थपूर्ण संवाद और गीत भी थे। आमतौर पर फिल्मों में गाने ठूसे जाते है लेकिन आनंद फिल्म के गाने फिल्म में मांग अनुरूप थी। “मैने तेरे लिए ही सात रंग के सपने चुने”, “कही दूर जब दिन ढल जाए “से लेकर” जिंदगी कैसी है पहेली”  गाने आज भी मन को छू लेते है।
इस फिल्म में सहनायक अमिताभ बच्चन थे।इस दौर में उनके नाम पर सफल फिल्मे नहीं थी । डॉमिनेंस की बाते भी हुई।राजेश खन्ना के संवेदनशील अभिनय के सामने अमिताभ बच्चन साधारण ही रहे। इसके बावजूद राजेश खन्ना ने 1971 का फिल्म फेयर  का सर्वश्रेष्ठ नायक और अमिताभ बच्चन ने सर्वश्रेष्ठ सहनायक   पुरस्कार जीता। कालांतर में ऋषिकेश मुखर्जी ने राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन को लेकर “नमक हराम” बनाई। इस बार आनंद के पलट अमिताभ बच्चन भारी पड़ गए।
आनंद और राजेश खन्ना आज भी पर्याय है।राजेश खन्ना नश्वर शरीर लेकर आए थे, चले गए लेकिन आनंद मरा नहीं करते। 

  • Narayan Bhoi

    Narayan Bhoi is a veteran journalist with over 40 years of experience in print media. He has worked as a sub-editor in national print media and has also worked with the majority of news publishers in the state of Chhattisgarh. He is known for his unbiased reporting and integrity.

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