जगदलपुर, छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके में सक्रिय नक्सलियों के टॉप लीडर पापाराव ने मंगलवार को सरेंडर कर दिया। इसके साथ ही बस्तर में लाल आतंक का अंत माना जाने लगा है। हालांकि केंद्र सरकार द्वारा घोषित डेडलाइन 31 मार्च 2026 की है। पापाराव अपने साथियों के साथ AK-47 समेत अन्य हथियार लेकर बीजापुर जिले के कुटरू थाने पहुंचा जहां से उसे सुरक्षाबल के जवान जगदलपुर लेकर पहुंचे। पापाराव पर 25 लाख रुपए का इनाम घोषित था.

नक्सली संगठन के टॉप लीडर पापाराव के सरेंडर का एक वीडियो भी सामने आया है। इस वीडियो में पापाराव अपने 18 साथियों के साथ आगे-आगे चल रहा है। वह रहवासी बस्ती से होकर गुजरता है। सरेंडर करते जाते समय उसके चेहरे पर मुस्कान है। कंधे पर AK-47 लेकर वह आगे चल रहा है जबकि उसके साथी पीछे-पीछे चल रहे हैं।
- पापाराव की उम्र 56 साल की है। वह बस्तर के सुकमा का रहने वाला है।
- बस्तर की DKSZCM मेंबर है, बस्तर के पश्चिमी डिवीजन का इंचार्ज था।
- पश्चिमी बस्तर में नक्सलवाद का सबसे बड़ा चेहरा माना जाता था।
- हिडमा के एनकाउंटर और देवा के सरेंडर के बाद लास्ट फाइटर था।
- पापाराव के सरेंडर से पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी पूरी तरह से खत्म मानी जा रही है।
पापाराव को संगठन में अलग-अलग नामों से जाना जाता था। उसे मंगू कहकर भी पुकारा जाता था। वह छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले का रहने वाला है। मौजूदा समय में वह DKSZCM मेंबर है। उसके सिर पर छत्तीसगढ़ सरकार ने 25 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। उसके पास नक्सली संगठन में अहम जिम्मेदारी थी। वह पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी का इंचार्ज और दक्षिण सब जोनल ब्यूरो का सदस्य है।

पापाराव करीब 25 सालों तक संगठन से जुड़ा रहा। सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर उसने सरेंडर करने का फैसला किया। वह अपनी सुरक्षा के लिए हमेशा अपने साथ AK-47 राइफल रखता है। पापाराव के बारे में कहा जाता है कि उसे बस्तर के जंगल और जमीन के हर कोने से परिचित है। यहां कारण है कि सुरक्षाबल के जवानों से वह 25 साल तक बचता रहा।
नक्सली पापाराव ने विजय शर्मा के सामने डाले हथियार
नक्सल कमांडर और बस्तर में दहशत के पर्याय रहे पापाराव ने 18 नक्सलियों के साथ गृहमंत्री विजय शर्मा के सामने सरेंडर कर दिया. बस्तर 5 दशक से ज्यादा समय तक हिंसा और बारूद के बीच पिसता रहा. 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सलमुक्त करने की गाइडलाइन से पहले ही छत्तीसगढ़ में नक्सलियों का लगभग खात्मा हो चुका है. बस्तर में सुरक्षाबलों की बढ़ती मौजूदगी और साय सरकार की पुनर्वास से पुनर्जीवन योजना की वजह से नक्सली लगातार सरेंडर कर रहे हैं. पापाराव पर 25 लाख रुपए का इनाम घोषित था.
अब संविधान के तहत अब लड़ाई लड़ी जाएगी – पापा राव
वहीं आत्मसमर्पण को लेकर पापा राव का बयान भी सामने आया. उन्होंने कहा कि बदलते हालात की वजह से फैसला लिया. पार्टी के भविष्य को बचाने के लिए सरेंडर किया. जान बचाने के लिए नहीं.. हथियारबंद संघर्ष से नुकसान बढ़ रहा है. अब संविधान के तहत लड़ाई लड़ी जाएगी. उन्होंने आगे कहा कि बस्तर की लड़ाई के लिए मुख्यधारा में लौटे हैं. सभी नक्सली अब मुख्यधारा में लौट आएं.
बचे नक्सली भी कर सकते हैं सरेंडर
वहीं पापाराव के बाद कोई भी बड़े कैडर का नक्सली अब छत्तीसगढ़ में नहीं बचा है. जानकारी है कि बस्तर में अब महज 40 के आसपास ही नक्सलियों के बचने की संभावना है… लेकिन ये सभी छोटे कैडर के हैं. इसके अलावा बचे हुए नक्सलियों के पास अब ना तो हथियार है और ना ही कोई इन्हें निर्देश देने वाला है. ऐसे में ये नक्सली भी अपनी जान बचाने के लिए गांवों में छिपे हुए हैं… और जल्द ही सरेंडर कर सकते हैं.






