PANDVANI;चली गई तीजनबाई………

बहुत कम लोगों को मालूम होगा कि पंडवानी का अर्थ क्या होता है। पंडवानी का अर्थ होता है “पांडव वाणी”। महाभारत पांडव और कौरवों के बीच उनके जन्म से लेकर मृत्यु तक की तथा कथा है। जाहिर है कथा है तो प्रसंग भी होंगे। इन प्रसंगों को कह कर, दिखाकर बताने के लिए नाटक नौटंकी हुई, कविताएं रची गई, गायन शैली में उद्बोधन भी होते रहे। छत्तीसगढ़ी बोली में महाभारत के प्रसंगों को लयबद्ध तरीके से प्रस्तुतीकरण  को पंडवानी कहा जाता है।

पंडवानी  गायन के दो तरीके है वेदमती और कापालिक । वेदमती तरीके में मंच में बैठकर शांतभाव से महाभारत के प्रसंगों को सुनाया जाता है। परंपरागत शैली के हिसाब से तीजनबाई को यही शैली अपनाने की बाध्यता थी क्योंकि कपालिक शैली में  मंच पर खड़े होकर हाव भाव के साथ रसो का सम्मिश्रण कर गायन होता है। इस शैली में आवाज  उच्चतम स्वर की ओर होता है क्योंकि महाभारत के प्रसंग में वीर रस की प्रधानता है। तीजनबाई, जिन्हें पंडवानी गाना था उन्होंने विद्रोह के स्वर को चुना और पुरुषों के समान कपालिक शैली में ही प्रयोग करते रही।
छत्तीसगढ़ की परम्परागत लोक कला में बहुत कम लोग ऐसे रहे है जिनकी प्रतिभा गांव से निकल कर शहर, जिला, राज्य, देश की सीमा पार कर सात समुंदर दूर देशों में भी विख्यात हुई। तीजनबाई  हाथ में तंबूरा रखे गनियारी, दुर्ग, छत्तीसगढ़ सहित हिंदुस्तान  को पंडवानी के जरिए ख्याति दिलाती है।
तीजनबाई को आगे लाने में हबीब तनवीर के सहयोग का स्मरण किए बगैर तीजनबाई की जीवनी को याद किया जाना अनुचित होगा। हबीब तनवीर ने तीजनबाई की प्रतिभा को पहचाना और उन्हें ऐसे मंचों पर अवसर दिलाया जहां से छत्तीसगढ़ की माटी की महक संसार भर में फैलते गई। तीजनबाई की पंडवानी की प्रसिद्धि का मूल्यांकन उन्हें मिले नागरिक अलंकरण पुरस्कार से किया जा सकता है। उन्हें पद्मश्री, पद्मभूषण और पद्मविभूषण पुरस्कार मिले।

देश में सत्यजीत रे, बिस्मिल्लाह खान, भीमसेन जोशी, भूपेन हजारिका, नागरेश्वर राव, अमिताभ बच्चन, जाकिर हुसैन, जोहरा सहगल,  यसुदास  जैसे विरले लोग है जिन्हें तीन नागरिक अलंकरण पुरस्कार मिले है। ऐसे हस्तियों में छत्तीसगढ़ की तीजनबाई  अकेली प्रतिनिधि है। आज तीजनबाई का देह पंचतत्व में विलीन हो गया । याद रह गई तो  महाभारत के जयद्रथ वध और जरासंध के वध का प्रसंग , जिसमें तीजन बाई  के  स्वर और भाव भंगिमा के साथ उनका तंबूरा भी बहुत कुछ बताता था। ……

संजय दुबे

  • Narayan Bhoi

    Narayan Bhoi is a veteran journalist with over 40 years of experience in print media. He has worked as a sub-editor in national print media and has also worked with the majority of news publishers in the state of Chhattisgarh. He is known for his unbiased reporting and integrity.

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