बिहार की राजधानी पटना का पटना पश्चिम विधान सभा क्षेत्र परिसीमन के बाद बांकीपुर विधानसभा के नाम तो जाना ही जाता था। इस विधान सभा क्षेत्र की दूसरी बड़ी पहचान इसलिए भी थी कि इस विधान सभा क्षेत्र से भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन पिछले पांच चुनाव से लगातार जीतते आ रहे थे। तीसरी पहचान बांकीपुर की अब ये है कि इस विधान सभा क्षेत्र के मतदाताओं ने पूर्व चुनाव रणनीतिकार और जन सुराज पार्टी के प्रमुख प्रशांत किशोर को अपना नया जन प्रतिनिधि चुना है, भाजपा के प्रत्याशी को छोड़कर।
बांकीपुर, विधानसभा को राष्ट्रीय सुर्खियाँ दो कारणों से मिली।पहला तो बिहार में भरत भूषण तिवारी के इनकाउंटर और दिल्ली में सीजेपी के प्रदर्शन के कुछ समय के अंतराल में बांकीपुर का उप चुनाव संपन्न हुआ।
बिहार में सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बने और संकेत दिया था कि बिहार में अपराधियों के साथ उत्तर प्रदेश का “इनकाउंटर मॉडल” अपनाया जाएगा।
उनके कार्यकाल का पहला इनकाउंटर एक सामाजिक कार्यकर्ता भरत भूषण तिवारी के रूप में हुआ। एक निहत्थे को सरेंडर करने के बाद नृशंस तरीके से सिर्फ इसलिए मार दिया गया क्योंकि वह कुछ दिनों से रिवाल्वर लेकर पुलिस वालो को चुनौती दे रहा था।
ये हत्या, देश भर के लोगों को नागवार गुजरी खासकर बिहार के सवर्णों को,साथ ही साथ युवा वर्ग भी आक्रोशित हुआ। इस घटना से बिहार की भाजपा के सत्ताधारी लोग और संगठन के लोगों ने न केवल दूरी बनाई बल्कि इनकाउंटर को सही ठहराया। यही नहीं जिम्मेदार लोग जिस सजा के पात्र है, उन्हें बचाते भी दिखे। ये जाहिर तौर पर दिख रहा था कि पुलिस और राजस्व विभाग के अनुविभाग स्तर के अधिकारी बराबरी से जिम्मेदार थे।
इस मामले को राजनैतिक रूप से भुनाने में जन सुराज दल के प्रशांत किशोर ने बाजी मारी। वे भरत भूषण तिवारी के घर गए और सार्वजनिक रूप से सम्राट चौधरी को चुनौती दिया कि पंद्रह दिन में अगर घटना की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो वे मुख्य मंत्री के घर का घेराव करेंगे।
दूसरा मामला दिल्ली के जंतर मंतर में युवा वर्ग का आंदोलन था।नीट परीक्षा में पेपर लीक को लेकर आक्रोश देशभर में था।पटना, शिक्षा का बहुत बड़ा केंद्र है।बिहार के शिक्षा का केंद्र बिंदु भी है। दिल्ली के अलावा पटना में भी छात्रों ने आंदोलन किया था। प्रशांत किशोर ने इस आंदोलन को भी समर्थन दिया था।
उनकी दोनों रणनीति बांकीपुर में काम कर गई और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के द्वारा छोड़ी गई सीट जिसमें महज नौ माह पूर्व हुए चुनाव में भाजपा 51,936 वोट से विजय श्री वरण की थी उसी सीट से भाजपा के प्रत्याशी नीरज कुमार 18953 वोट से हार गए। माना जा सकता है कि प्रशांत किशोर ने न केवल 51936 वोट के अंतर को पार किया बल्कि 18953 वोट अतिरिक्त रूप से हासिल किए। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन को नवंबर 2025 के विधान सभा चुनाव में कुल वोट का 66. 66 प्रतिशत वोट मिले थे। उप चुनाव में भाजपा का वोट प्रतिशत गिर कर 34.34 प्रतिशत पर आ गया। लगभग 32 फीसदी वोट का जनाधार गिरना सहजता से स्वीकार नहीं किया जा सकता है।
प्रशांत किशोर,नई पारी के रूप में विधायक बन कर विधानसभा प्रवेश कर रहे है। चुनावों के रणनीतिकार से राजनीति के नीतिकार बनने के बाद वे कैसे प्रतिष्ठित होंगे, वक्त का प्रश्न है। ये जरूर है कि प्रशांत किशोर ने भाजपा के बेफिक्र नींद में खलल तो डाली है।अकेला चना भाड़ झोक सकता है।
स्तंभकार- संजय दुबे







