1 जुलाई से प्रारंभ होने संबंधी सूचना भ्रामक एवं फर्जी
रायपुर, संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय, छत्तीसगढ़ द्वारा जारी पत्र दिनांक 12 जून 2026 के अनुसार राज्य की समस्त शासकीय एवं अशासकीय शालाओं में शैक्षणिक सत्र 2026-27 का विधिवत संचालन 16 जून 2026 (मंगलवार) से प्रारंभ किया जाएगा। इस संबंध में सोशल मीडिया के विभिन्न माध्यमों पर प्रसारित की जा रही यह सूचना कि शैक्षणिक सत्र 01 जुलाई 2026 से प्रारंभ होगा, पूर्णतः असत्य, भ्रामक तथ्यों से परे एवं फर्जी है। बहारहाल नए शिक्षा सत्र में विद्यार्थी नए कलर की यूनिफार्म पहनकर स्कूल जाएंगे।
लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा स्पष्ट किया गया है कि विद्यालयों के संचालन की अधिकृत तिथि 16 जून 2026 ही है। अतः विद्यार्थियों, अभिभावकों एवं आम नागरिकों से अपील की जाती है कि वे केवल विभाग द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं पर ही विश्वास करें तथा सोशल मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट एवं भ्रामक जानकारी पर ध्यान न दें।
स्कूलों में राष्ट्रगान, राज्यगीत, भोजन मंत्र
इसी बीच, शिक्षा विभाग ने स्कूलों में राष्ट्रगान, राज्यगीत, भोजन मंत्र और महापुरुषों की जीवनी के वाचन जैसे सकारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं, जिसका उद्देश्य बच्चों में भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों का संचार करना है। यह प्रयास सराहनीय है, परंतु शिक्षाविदों का मानना है कि जब तक बच्चों को बैठने के लिए एक सुरक्षित छत और स्कूल तक पहुंचने के लिए सुगम मार्ग नहीं मिलेगा, तब तक शैक्षिक गुणवत्ता के ये दावे अधूरे ही रहेंगे।
3789 स्कूल भवन जर्जर
16 जून से प्रदेश भर के स्कूलों में शाला प्रवेश उत्सव के साथ नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत होने जा रही है, लेकिन जमीनी हकीकत सरकारी दावों पर भारी पड़ रही है। प्रदेश में आज भी लगभग 3789 स्कूल भवन जर्जर स्थिति में हैं, जो न केवल छात्रों की पढ़ाई में बाधा हैं, बल्कि मानसून के दौरान बड़ी दुर्घटनाओं को न्योता दे रहे है। प्राप्त आकडों के अनुसार प्रदेश में जर्जर स्कूल भवनों में 2737- प्राथमिक स्कूल, 947- पूर्व माध्यमिक स्कूल, 29- हाई स्कूल एवं 76- हायर सेकंडरी स्कूल शाअमिल बताए गए है।
वनांचल की स्थिति सबसे दर्दनाक
सबसे दर्दनाक स्थिति वनांचल क्षेत्रों की है, जहां बच्चे केवल स्कूल भवन की समस्या से नहीं, बल्कि जान जोखिम में डालकर शिक्षा तक पहुंचने को मजबूर हैं। बालोद के कटरेल गांव में माध्यमिक शिक्षा के लिए बच्चों को रोज पांच किलोमीटर घने जंगल का रास्ता तय करना पड़ता है। कई जगहों पर शिक्षक स्वयं जान जोखिम में डालकर नाले पार कर स्कूल पहुंचते हैं।
दुर्घटना होने पर डीईओ जिम्मेदार
स्कूल शिक्षा सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने पिछले दिनों बैठक लेकर सभी जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) से कहा है कि वे जर्जर स्कूल में कक्षाएं संचालित नहीं करें। इसके यदि कोई दुर्घटना होती है, जो इसके लिए सीधे तौर पर डीईओ जिम्मेदार होंगे।
28 लाख से ज्यादा यूनिफॉर्म की सप्लाई हो चुकी
16 जून से शुरू होने वाले नए शिक्षा सत्र में विद्यार्थी नए कलर की यूनिफार्म पहनकर स्कूल जाएंगे। इन दिनों सत्र शुरू होने से पहले यूनिफार्म की सप्लाई करने पर जोर दिया जा रहा है। खास बात यह है कि यूनिफॉर्म के कलर और डिजाइन में बदलाव किया गया है। ब्लू चेक प्रिंट वाली शर्ट और पैंट व ट्यूनिक स्लेटी कलर की होगी। पिछले सत्र में सरगुजा और बिलासपुर संभाग में ये बदलाव किए गए थे। इस बार रायपुर, दुर्ग और बस्तर संभाग समेत प्रदेशभर के सभी सरकारी स्कूलों के बच्चे नई यूनिफॉर्म में नजर आएंगे। विद्यार्थियों को एक साथ दो सेट यूनिफार्म दी जाएंगी। राज्य में यूनिफॉर्म की सिलाई और सप्लाई का कार्य हाथकरघा विकास एवं विपणन संघ द्वारा किया जा रहा है। नए सत्र में 50,93,769 यूनिफॉर्म की सप्लाई की जाएगी। शिक्षा विभाग के लिए 10,90,362 और शिक्षा मिशन की ओर से 40,03,407 यूनिफॉर्म की मांग आई है। इनमें से 28 लाख से ज्यादा यूनिफॉर्म की सप्लाई हो चुकी है।







