
रायपुर, अचानकमार टाइगर रिजर्व (एटीआर) में बाघों की संख्या बढ़ाने और उनकी आनुवंशिक विविधता में सुधार के लिए मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से 3 बाघिनों को लाने की तैयारी चल रही है। बारिश का मौसम बीतने के बाद नवंबर में वन विभाग की टीम बांधवगढ़ जाकर बाघिनों का चयन करेगी और स्थानांतरण की प्रक्रिया पूरी करेगी।
इन बाघिनों को कटनी, जबलपुर और बिलासपुर के रास्ते एटीआर लाया जाएगा। सुरक्षा के लिहाज से इन्हें पहले कुछ दिनों तक बाड़े में रखा जाएगा। इसके बाद इनकी आवाजाही पर नजर रखने के लिए गले में रेडियो कॉलर लगाकर खुले जंगल में छोड़ा जाएगा। इस पूरी योजना को राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) और राज्य सरकार से मंजूरी मिल चुकी है।
914 वर्ग किमी में फैला है रिजर्व
एनटीसीए के नियमों के मुताबिक हर 4 साल में बाघों की गणना होती है। वर्ष 2022 की गणना में एटीआर में 18 बाघ मिले थे, हालांकि वन विभाग का दावा है कि वर्तमान में यहां करीब 35 बाघ विचरण कर रहे हैं ।एटीआर 914.018 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। यह मुंगेली व बिलासपुर तथा मध्य प्रदेश के डिंडोरी व अनूपपुर जिलों की सीमाओं से लगता है। यह इलाका प्रसिद्ध कान्हा -अचानकमार कॉरिडोर और गुरु घासीदास-तमोर पिंगला से जुड़ा हुआ है।
हाथी और वनभैंस के बाद अब बाघों का ट्रांसलोकेशन
राज्य में वन्यजीवों के संरक्षण के लिए दूसरे राज्यों से जानवर लाने का प्रयोग पहले भी सफल रहा है। मानव-हाथी द्वंद्व रोकने के लिए जनवरी 2018 में कर्नाटक से 5 प्रशिक्षित कुमकी हाथी लाए गए थे। इन्हें महासमुंद के पासीद कैंप में 10 महीने रखने के बाद सूरजपुर के रमकोला (तमोर पिंगला) हाथी रेस्क्यू सेंटर में शिफ्ट किया गया था। राज्य पशु वनभैंसों का कुनबा बढ़ाने के लिए असम के मानस नेशनल पार्क से अप्रैल 2020 में 2 और वर्ष 2023 में 4 मादा वनभैंसें लाई गईं।
वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि मानसूनी सीजन के बाद अधिकारियों की टीम 3 बाघिनों को लाने जाएगी। सभी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं। अभी जंगल में 35 बाघ हैं, 3 बाघिनों के आने से इनके कुनबे में और बढ़ोतरी होगी।







