रायपुर, डीजल केवल छोटे- बड़े वाहनों के चलने के लिए जरूरी नहीं है बल्कि खेती किसानी काम के लिए भी जरूरी है।छत्तीसगढ में
खरीफ फसल की तैयारी के लिए जमीन की खुदाई सबसे बड़ा काम है। इसके लिए ट्रैक्टर अनिवार्य है। ट्रैक्टर के जरिए ही खाद बीज का परिवहन होता है। खेती के अलावा निर्माण कार्य चाहे वह सरकारी हो या निजी डीजल के बिना बड़े वाहन नहीं चल सकते है। अस्पताल में आपातकाल में बिजली के लिए, मोबाइल टावर के संचालन के लिए डीजल, पेट्रोल से ज्यादा महत्वपूर्ण ईंधन है।
अमेरिका इराक के बीच चल रहे तनाव युद्ध के चलते हिंदुस्तान में डीजल पेट्रोल की आपूर्ति पर असर पड़ रहा है।अफवाहों के चलते अचानक ही पैनिक कंस्यूमर खड़े हो जाते है। कुछ दिन पहले ऐसे ही घटना के चलते पेट्रोल पंपो में हुजूम लग गया था। महज तीन दिन में सत्रह दिन का पेट्रोल बिक गया।
छत्तीसगढ़ सरकार ने संभावित जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकने की दृष्टि से महत्वपूर्ण नियम बनाए है
पहला ये कि पेट्रोल केवल वाहनों की टंकी में ही डालेगा। किसी भी उपभोक्ता को बॉटल या जरीकेन में पेट्रोल नहीं दिया जाएगा। यदि कोई पेट्रोल पंप वाला ऐसा करता है और कोई उपभोक्ता अनधिकृत लाभ पाता है तो दोनों के खिलाफ अनधिकृत विक्रय और क्रय का प्रकरण बनेगा। दोनों के विरुद्ध मोटर स्पिरिट और उच्च वेग डीजल(प्रदाय और वितरण का विनियमन और अनाचार निवारण) आदेश 2005 सहित आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत कार्यवाही की जाएगी। पेट्रोल के इस प्रकार की बिक्री को “अधिकृत विक्रय” माना जाएगा।
छत्तीसगढ़ सरकार के खाद्य नागरिक आपूर्ति मंत्रालय की सचिव बाबा साहब कंगाले ने इस संबंध में आदेश जारी कर खाद्य अधिकारियो को अधिकार सम्पन्न बनाया है। डीजल को खेती, निर्माण के अलावा आपातकालीन कार्य हेतु संबंधित उपभोक्ता को अनुविभागीय अधिकारी राजस्व के कार्यालय में आवेदन दिए जाने पर डीजल पंपों को सुरक्षा मानकों के पालन कर डीजल प्रदाय करने की व्यवस्था बनाई गई है। खेती अथवा निर्माण कार्यों के लिए अधिकतम चौबीस सौ लीटर डीजल प्रदाय किया जा सकता है।इससे अधिक मात्रा में खरीदने के लिए उपभोक्ता के पास स्टोरेज लाइसेंस होना अनिवार्य है।
चौबीस सौ लीटर से अधिक डीजल को एक साथ रखने के लिए विस्फोटक लाइसेंस जरूरी है। वर्तमान में सामान्य उपभोक्ताओं को मिलने वाले डीजल का रेट 98 रूपये 29 पैसे प्रति लीटर है वहीं व्यावसायिक डीजल का रेट 109 रुपये 50 पैसे प्रति लीटर है। लगभग दस रुपए लीटर डीजल का फर्क जमाखोरी और कालाबाजारी के लिए नया बाजार खड़ा करता है।







