राजनांदगांव, छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ भाजपा मंडल को भंग किए जाने के फैसले के बाद पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ गया है। मंडल के सैकड़ों पदाधिकारी और कार्यकर्ता विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह से मिले और फैसले पर पुनर्विचार की मांग की। उनका कहना था कि मंडल की कोई गलती नहीं थी, फिर भी बिना विश्वास में लिए उसे भंग कर दिया गया। डॉ. रमन सिंह ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि उनके साथ अन्याय नहीं होगा और संगठन के वरिष्ठ नेताओं से चर्चा कर उचित निर्णय लिया जाएगा।
सैकड़ों कार्यकर्ता पहुंचे स्पीकर हाउस
जानकारी के अनुसार डोंगरगढ मंडल अध्यक्ष जसमीत बन्नोआना, नगर पालिका अध्यक्ष रमन डोंगरे, उपाध्यक्ष, पार्षदों और विभिन्न मोर्चों के पदाधिकारियों सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शाम करीब 5 बजे स्पीकर हाउस पहुंचे। प्रतिनिधिमंडल ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह से मुलाकात कर संगठन के फैसले पर अपनी नाराजगी जताई।
‘मंडल की गलती नहीं, फिर कार्रवाई क्यों?’
बैठक के दौरान पदाधिकारियों ने कहा कि डोंगरगढ़ में आंतरिक विवाद के चलते पांच नेताओं को पहले ही पार्टी से निष्कासित किया जा चुका है। ऐसे में पूरे मंडल को भंग करना उचित नहीं है। उनका कहना था कि मंडल को बिना कोई कारण बताए और स्थानीय पदाधिकारियों को विश्वास में लिए बिना भंग कर दिया गया, जिससे कार्यकर्ताओं में नाराजगी है। प्रतिनिधिमंडल ने विधानसभा अध्यक्ष से डोंगरगढ़ भाजपा मंडल को दोबारा बहाल कराने की मांग की। कार्यकर्ताओं का कहना था कि संगठन के इस फैसले से जमीनी स्तर पर पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल प्रभावित हुआ है। उन्होंने संगठन से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया।
डॉ. रमन सिंह बोले-चर्चा करेंगे
मुलाकात के दौरान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने सभी पदाधिकारियों की बात गंभीरता से सुनी। उन्होंने आश्वासन दिया कि डोंगरगढ़ मंडल के साथ किसी प्रकार का अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि वे संगठन के वरिष्ठ नेताओं अजय जमवाल और पवन साय से इस विषय पर चर्चा करेंगे। डॉ. सिंह ने यह भी कहा कि डोंगरगढ़ से 10-15 प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर उनका पक्ष विस्तार से सुना जाएगा, जिसके बाद संगठन स्तर पर सामूहिक निर्णय लिया जाएगा।
लंबे समय से चल रहा है विवाद
गौरतलब है कि डोंगरगढ भाजपा में पिछले कुछ समय से अंदरूनी खींचतान और सोशल मीडिया पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा था। इसी विवाद के बाद पार्टी ने पांच नेताओं को निष्कासित कर दिया था। इसके बाद संगठन ने डोंगरगढ़ मंडल को भी भंग करने का फैसला लिया, जिसका अब स्थानीय पदाधिकारी और कार्यकर्ता खुलकर विरोध कर रहे हैं। अब सभी की नजर संगठन के अगले फैसले पर है कि डोंगरगढ़ मंडल को दोबारा बहाल किया जाता है या नहीं।







