पिछले साल मध्य प्रदेश का इंदौर शहर में राजा रघुवंशी की हत्या के मामले में उनकी हालिया में विवाहित पत्नी सोनम सहित तथाकथित प्रेमी का नाम सामने आया था। इस मामले में सोनल को सशर्त जमानत मिल गई है। जमानत के कारण ही राजा रघुवंशी हत्याकांड की याद सोशल मीडिया में पुनर्जीवित हुई थी। ज्यादा दिन नहीं बीते है कि पुणे में लगभग ऐसी ही घटना की पुनरावृति हो गई है। पिछले साल मध्य प्रदेश इस साल महाराष्ट्र में केतन अग्रवाल की उनकी होने वाली पत्नी सिया ने सोनम की भूमिका निभाई। सिया और उनके तथाकथित प्रेमी चेतन ने मिलकर घटना को अंजाम देते हुए लोहगढ़ किले की ऊंचाई से केतन को धक्का देकर मार डाला। इस मामले में सिया और केतन गिरफ्तार किए जा चुके है।
सोनम के द्वारा अपने पति राजा और सिया द्वारा होने वाले पति केतन की हत्या के दो पहलू सामने है।
पहला पहलू ये है कि सोनम और सिया दोनों ही शादी और सगाई के पहले ही किसी अन्य व्यक्ति से प्रेम करते रहे थे। कानून दोनों को अठारह साल से अधिक उम्र के होने के कारण अपने अच्छे बुरे का निर्णय लेने के लिए सक्षम बनाया था। वे अपने पसंदीदा व्यक्ति से विवाह कर सकते थे। दूसरा पहलू ये है कि दोनों युवतियों के प्रेम के संबंध में दोनों के माता पिता सहित परिवार के अन्य सदस्य अनभिज्ञ थे या फिर जानते हुए परिवार की प्रतिष्ठा के लिए बेमेल संबंध के लिए तैयार नहीं हुए। अक्सर परिवार ये मानकर चलता है कि लड़कियां नासमझ होती है, नादान होती है, भोली होती है।फिसल जाती है।इसका मतलब ये नहीं होता है कि लड़की समझदार है और अपना भला समझती है। ये धारणा भी प्रबल है कि एक बार सात फेरे लग जाए तो अतीत से पीछा छूट ही जाता है। विवाह के पहले एक और विवाह के बाद लड़की के हिस्से में दो परिवार की प्रतिष्ठा सामने आ जाती है।लड़कियां समझौता कर लेती है।पति परमेश्वर, सिद्ध हो जाते है।
ये बीते जमाने की बात है।आज का जमाना बदला हुआ है।सामाजिक विघटन की गति इतनी तेज है कि परिवार सिकुड़ गया है।एक या दो संतान के बीच सिमटे परिवार में केवल शौक पूरे किए जाने की मजबूरी है।लाड़ दुलार का अतिरेक बढ़ते बच्चों को जिद्दी बना रहा है। लड़कियां रोजगार की दिशा में पुरुषों के साथ कदमताल कर रही है, अच्छी बात है लेकिन आर्थिक निर्भरता के चलते स्वच्छंदता भी बढ़ते जा रही है। सिया इसी क्रम की लड़की प्रतीत होती है। प्रेम करना मानवीय गुण है। कोई भी किसी से कभी भी कही भी प्रेम कर सकता /सकती है।इसमें जाति संप्रदाय धर्म , स्थिति का कोई लेना देना नहीं है। सोनम और सिया दोनों ने ही प्रेम किया। वह कौन सी पृष्ठभूमि और परिस्थिति थी जिसके चलते न तो वे अपनी बात कह सकी और न ही कहे जाने की स्थिति में परिवार वालों ने बात मानने से इंकार कर दिया। सीधी बात है,परिवार की प्रतिष्ठा का प्रश्न और युवतियों के निर्णय पर प्रश्नचिन्ह?
इस प्रकार की अस्वीकृति के बाद ज्यादातर मामले में समझौता ही होता है।इक्के दुक्के मामले में सोनम, सिया जैसे लोग इतने खतरनाक कदम उठाते है। किसी परिवार के सदस्य को मार कर अपने लिए रास्ता बनाना अनुचित है|
संजय दुबे







