बारह जून से उन्नीस जुलाई तक दुनियां के अडतालीस देश सर्वाधिक प्रतिष्ठित खेल फुटबॉल के फीफा कप के लिए जूतम पैजार के लिए सज्ज हो गए है।बीते छियानवे साल के इतिहास को देखे तो फीफा कप केवल देशों तक ही सिमटा हुआ है।दूसरे अर्थों में ये भी मान सकते है कि फुटबॉल खेल में तकनीक, कौशल, योजना बनाने के नाम पर इन्हीं देशों के द्वारा सबसे अधिक मेहनत की जाती है।
जनसंख्या ,इन देशों के लिए मायने नहीं रखता है। इस बार फीफा कप में भाग लेने वाले देशों में सबसे कम आबादी वाला देश कुरासाओ है। सिर्फ डेढ़ लाख की आबादी वाला देश है। इतनी आबादी तो हिंदुस्तान के किसी छोटे जिले की रहती है। हिंदुस्तान के लोग इस बात पर अफसोस करते आए है कि बढ़ती आबादी के बावजूद हमारा देश केवल दर्शकों की जमात में बैठकर फीफा कप का रोमांच उठाता रहा है और न जाने कब तक उठाते रहेगा।
फीफा कप खेलने के केवल दो तरीके हैं पहला बहुत कठिन है। अपने महाद्वीप के क्वालीफाइंग राउंड में प्रतिभागियों में शामिल हो जाइये, जीत कर। दूसरा तरीका है -मेजबानी करिए। मेजबान देश को सीधे खेलने का अवसर मिलता है। जिस तरह से योरोप और अमेरिका महाद्वीप का फुटबॉल में वर्चस्व है उस आधार पर मेजबानी फिलहाल असंभव है। भविष्य में चीन, मलेशिया सहित दीगर देशों के साथ आयोजन का जिम्मा मिले तो भारतीय फुटबॉलर फीफा कप में खेलते दिख सकते है। ये केवल ख्याली पुलाव है।
दुनियां के लगभग सभी देशों के सदस्यता वाला खेल है -फुटबॉल। किसी भी अन्य खेल में इतने देश एक कप जीतने के लिए जमा नहीं होते है। क्रिकेट के टेस्ट फॉर्मेट में नियमित रूप से खेलने वाले देशों की संख्या केवल बारह है जिसमें अफगानिस्तान और आयरलैंड को छोड़ दे तो दस बच जाते है। 2026 में खेले जाने वाले अड़तालीस टीमों में अकेले यूरोप से सोलह टीमें हिस्सा ले रही हैं। अफ्रीका से नौ, एशिया से आठ, दक्षिण अमेरिका से छः, उत्तर और मध्य अमेरिका से छः और ओशिनिया सेएक टीम शामिल है।
नब्बे मिनट के खेल में जिस मैदान की लंबाई सौ से एक सौ दस मीटर और चौड़ाई चौसठ से पचहत्तर मीटर के बीच होती है। बाइस खिलाड़ी अलग अलग व्यूह रचना में खेलते दिखते है। आज के जमाने में फुटबॉल क्या सभी खेल शतरंज के समान मानसिक बुद्धि का खेल बन गया है।सूचना संचार में आए क्रांति की वजह से हर टीम प्रतिद्वंद्वियों की व्यूह रचना, खेल नीति, का आंकलन करती है और अपने जीत के लिए कोशिश करती है। स्क्रीन और कागज पर बनी योजनाओं से परे मैदान में खेल होता है। हर क्षण रुख बदलता है।दो टीम जो परस्पर खेलती है उनका लक्ष्य एक ही होता है, हर हाल में जीत। लीग राउंड में ड्रा खेलना आगे के लिए कठिनाई खड़ा करने वाली होती है।
तो तैयार हो जाइए फुटबॉल के बढ़ते रोमांच के हमसफर होने के लिए। पुराने चांवल के रूप में पुर्तगाल के रोनाल्डो, अर्जेटीना के मैसी, है जिनका छठवां फीफा कप होगा। बीते चौबीस साल से ये दोनों खिलाड़ी अपने अपने देश का प्रतिनिधित्व कर रहे है। संभवतः अगले फीफा कप में ये दोनों न दिखे।
अफसोस करने वाली बात ये भी है कि चार बार की फीफा कप विजेता टीम इटली क्वालीफाई नहीं कर पाई है।1934,1938,1982, और 2006 में इटली की टीम विजेता रही है। इस बार, उज्बेकिस्तान, जॉर्डन, काबोवर्डे और कुरासाओ, ऐसे देश है जो पहली बार फीफा कप में खेलते दिखेंगे।
जीतेगा कौन?
फीफा कप आठ देशों के बीच ही जीत के लिए रखी जाती है, ऐसा मान सकते है। ब्राजील, जर्मनी, अर्जेंटीना, फ्रांस, स्पेन के बीच ही सर्वश्रेष्ठता की नब्बे मिनट की लड़ाई है।इस बार के अधिकांश मैच देर रात को होंगे याने उल्लू बनना होगा। आपकी जानकारी के लिए 1950 में आयोजित फीफा कप में हिंदुस्तान भाग ले सकता था लेकिन 1952 के ओलंपिक खेल सहित फुटबॉल संघ का व्यवस्थित न होने और देश के खिलाड़ियों के द्वारा नंगे पैर खेलने के चलते अवसर पैर से निकल गया।
स्तंभकार- संजयदुबे







