जगदलपुर, छत्तीसगढ के बस्तर अंचल में चर्चित रहे पूर्व माओवादी टिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवजी ने तेलंगाना लॉ कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (LAWCET) में राज्य स्तर पर 349वीं रैंक हासिल की है। यह उनके विद्रोह का रास्ता छोड़कर सार्वजनिक जीवन में आने की दिशा में एक अहम कदम है। 5 जून को घोषित नतीजों में देवजी ने 57 अंक हासिल किए, जिससे वे पांच साल के लॉ डिग्री प्रोग्राम में दाखिले के लिए योग्य हो गए।
बस्तर समेत अन्य माओवादी आंदोलन में लगभग चार दशक बिताने वाले देवजी ने इस साल की शुरुआत में सरेंडर किया था और मुख्यधारा के समाज में लौटे थे। कानूनी शिक्षा लेने का उनका फैसला सशस्त्र संघर्ष से हटकर संवैधानिक ढांचे के भीतर काम करने की ओर एक बड़ा बदलाव दिखाता है। फरवरी में सरेंडर करने के बाद देवजी ने कानून की पढ़ाई करने और अपने कानूनी ज्ञान का इस्तेमाल हाशिए पर मौजूद समुदायों की मदद करने और लोकतांत्रिक संस्थाओं के ज़रिए न्याय पाने के लिए करने की इच्छा जताई थी। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि वे टकराव के बजाय कानूनी तरीकों से सामाजिक मुद्दों को हल कर पाएंगे।
इंटरमीडिएट परीक्षा में शामिल
एक और अहम घटनाक्रम में, देवजी हाल ही में अपनी रुकी हुई इंटरमीडिएट परीक्षा के एक पेपर में शामिल हुए। 1983-85 के शैक्षणिक सत्र के दौरान पढ़ाई छोड़ने की वजह से वे इसे पूरा नहीं कर पाए थे। उस समय वे कोरुटला जूनियर कॉलेज के छात्र थे और रेडिकल स्टूडेंट यूनियन से जुड़ गए थे, जिसके बाद वे माओवादी आंदोलन में शामिल हो गए।
बोर्ड ऑफ़ इंटरमीडिएट एजुकेशन से विशेष अनुमति मिलने के बाद, देवजी ने 13 मई को जगतियाल जिले के कोरुटला में एक केंद्र पर सप्लीमेंट्री परीक्षा दी। उनके परीक्षा में शामिल होने से लोगों और मीडिया का काफी ध्यान उनकी ओर गया। उस परीक्षा के नतीजे अभी घोषित होने बाकी हैं।







