नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने देश के औद्योगिक और व्यावसायिक एलपीजी उपभोक्ताओं को एक बड़ी राहत देते हुए सप्लाई से जुड़े प्रतिबंधों को वापस लेने का फैसला किया है. पश्चिम एशिया में उपजे भू-राजनीतिक संकट (मुख्य रूप से स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के कारण) के बाद से ही देश में एलपीजी के आयात और घरेलू उपलब्धता पर काफी दबाव देखा जा रहा था. इस वजह से आम घरों में इस्तेमाल होने वाली डोमेस्टिक एलपीजी की निर्बाध सप्लाई को बनाए रखने के लिए मार्च 2026 से कमर्शियल और इंडस्ट्रियल सेक्टर्स की एलपीजी हिस्सेदारी में बड़ी कटौती लागू की गई थी.
अब एलपीजी की कुल सप्लाई स्थिति में आए महत्वपूर्ण सुधार, बढ़े हुए घरेलू उत्पादन और आयात के नए विकल्पों (डाइवर्सिफिकेशन) के सफल होने के बाद सरकार ने इन प्रतिबंधों को हटाने का फैसला किया है. पेट्रोलियम सचिव डॉ. नीरज मित्तल ने इस संबंध में सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को एक आधिकारिक पत्र जारी कर नई व्यवस्था को तुरंत प्रभावी करने के निर्देश दिए हैं. सरकार के इस कदम से उन तमाम सेक्टर्स की उत्पादन लागत और ईंधन की किल्लत दूर होगी जो पिछले कई महीनों से वैकल्पिक और महंगे साधनों पर निर्भर थे.
इस नए फैसले के तहत कमर्शियल उपयोग में आने वाले नॉन-डोमेस्टिक पैक्ड एलपीजी यानी 19 किलोग्राम वाले सिलेंडरों की सप्लाई पर जितने भी सेक्टोरल प्रतिबंध या सीमाएं लगाई गई थीं, उन्हें पूरी तरह खत्म कर दिया गया है. अब सभी कमर्शियल डीलर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स को पश्चिम एशिया संकट से पहले के स्तर (Pre-West Asia Crisis Level) पर पूरी क्षमता के साथ शत-प्रतिशत गैस की सप्लाई फिर से शुरू कर दी गई है. इसका सीधा फायदा होटल, रेस्टोरेंट्स, छोटे ढाबों, अस्पतालों और फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स को मिलेगा जो सीधे तौर पर इन सिलेंडरों का इस्तेमाल करते हैं.





