भुवनेश्वर, छत्तीसगढ में कोयला रायल्टी घोटाले तरह ओडिशा में भी लघु खनिजों से एकत्र की गई रॉयल्टी की राशि के जमा होने की प्रक्रिया में एक बड़े वित्तीय हेरफेर का मामला सामने आया है। इस गंभीर मुद्दे को लेकर राज्य सरकार के राजस्व विभाग और पंचायती राज विभाग के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई है।
ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, साल 2023-24 से 2025-26 के बीच पंचायती राज विभाग के अंतर्गत एकत्र की गई करीब 283 करोड़ रुपये की रॉयल्टी राशि को सीधे सरकारी खजाने में जमा नहीं किया गया। यह भारी-भरकम रकम सरकारी खाते में जाने के बजाय विभिन्न तहसीलदारों के निजी या विभागीय बैंक खातों में जमा करा दी गई थी।
इस बड़े वित्तीय हेरफेर का खुलासा होने के बाद पंचायती राज विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। विभाग के विशेष सचिव सूर्यनारायण दास ने इस संबंध में राजस्व विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को एक आधिकारिक पत्र लिखा है। पत्र में निर्देश दिया गया है कि जिन-जिन तहसीलदारों के बैंक खातों में यह सरकारी पैसा जमा किया गया था, उन सभी बैंक खातों को तत्काल प्रभाव से फ्रीज कर दिया जाए। इसके साथ ही इस पूरे मामले की गहन जांच करने और सभी जिलाधिकारियों से जांच रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।
नियमों के मुताबिक, पंचायती राज संस्थाओं द्वारा एकत्र किए जाने वाले लघु खनिज राजस्व को बिना किसी देरी के सीधे सरकारी राजकोष में जमा करना अनिवार्य होता है, लेकिन नियमों को ताक पर रखकर इस राशि को तहसीलदारों के खातों में रखा जा रहा था।
सरकार ने आदेश दिया है कि तहसीलदारों के खातों में जमा इस रॉयल्टी राशि की पूरी जांच की जाए और तुरंत इस पूरे पैसे को सरकारी खजाने में ट्रांसफर किया जाए। भविष्य में इस तरह की वित्तीय अनियमितताओं को रोकने के लिए सरकार ने निर्देश दिया है कि अब से सभी पंचायती राज संस्थाएं लघु खनिज रॉयल्टी को केवल ‘साइबर ट्रेजरी’ के माध्यम से सीधे सरकारी खाते में ही जमा करेंगी। इस मामले के सामने आने के बाद से राज्य के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।







