जगदलपुर, केंद्र और राज्य सरकारों के संयुक्त नक्सल विरोधी अभियान को एक और बड़ी कामयाबी मिलने जा रही है। बस्तर में सक्रिय मोस्ट वॉन्टेड नक्सली कमांडर सुन्नम पापाराव मंगलवार को आत्मसमर्पण करने की तैयारी में है। जानकारी के अनुसार वह अपने 17 साथियों के साथ सुरक्षाबलों के सामने सरेंडर करेगा। सुकमा जिले के निवासी पापाराव को मंगू दादा उर्फ चंद्रन्ना के नाम से भी जाना जाता है।
वह नक्सल संगठन की दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DSZC) का सदस्य रह चुका है। इसके अलावा वह पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी का प्रभारी और दक्षिण सब जोनल ब्यूरो से भी जुड़ा हुआ था। पापाराव लंबे समय से बीजापुर और सुकमा समेत बस्तर के कई इलाकों में सक्रिय रहा है। क्षेत्र की भौगोलिक जानकारी होने के कारण वह कई बार सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ों में बच निकलने में सफल रहा।
40 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज
बताया जाता है कि वह भैरमगढ़ और पश्चिम बस्तर क्षेत्र में हुए कई हमलों में शामिल रहा है और उस पर 40 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें कई गिरफ्तारी वारंट भी शामिल हैं। सरकार ने देश को नक्सल मुक्त बनाने के लिए 31 मार्च 2026 तक का लक्ष्य निर्धारित किया है। बीते कुछ समय में सुरक्षाबलों ने कई बड़े नक्सलियों को मुठभेड़ों में मार गिराया है, वहीं दूसरी ओर पुनर्वास नीति के जरिए नक्सलियों को आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस नीति का असर भी अब जमीनी स्तर पर देखने को मिल रहा है।
31 मार्च 2026 तक का लक्ष्य तय
केंद्र और राज्य सरकारों के नक्सल विरोधी अभियान को एक बड़ी सफलता मिलने जा रही है। मोस्ट वॉन्टेड नक्सली कमांडर सुन्नम पापाराव मंगलवार को अपने 17 साथियों के साथ आत्मसमर्पण करने वाला है। यह कदम सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई और बढ़ते दबाव का परिणाम माना जा रहा है। वह लंबे समय से बीजापुर और सुकमा समेत बस्तर के घने जंगलों में सक्रिय रहा।
इलाके की भौगोलिक जानकारी होने के कारण वह कई बार मुठभेड़ों से बच निकलने में सफल रहा। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, पापाराव भैरमगढ़ और पश्चिम बस्तर क्षेत्र में हुए कई बड़े हमलों में शामिल रहा है। उसके खिलाफ 40 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं और कई वारंट भी जारी हैं। सरकार ने देश को नक्सल मुक्त बनाने के लिए 31 मार्च 2026 तक का लक्ष्य तय किया है। पिछले दो वर्षों में सुरक्षाबलों ने कई बड़े नक्सल नेताओं को ढेर किया है, वहीं पुनर्वास नीति के तहत नक्सलियों को आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। पापाराव का संभावित सरेंडर इसी बदलते माहौल का संकेत माना जा रहा है।
नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई निर्णायक मोड़ पर-सीएम साय
मोस्ट वॉन्टेड नक्सली कमांडर पापा राव के संभावित सरेंडर को लेकर विष्णुदेव साय का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के मजबूत इरादों और लगातार चल रहे अभियानों के कारण नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है और इसके सकारात्मक परिणाम अब स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद को समाप्त करने की तय समयसीमा 31 मार्च 2026 अब बेहद करीब है। ऐसे में यदि पापा राव जैसे बड़े नक्सली नेता आत्मसमर्पण करते हैं, तो यह सुरक्षा अभियानों की बड़ी सफलता मानी जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में पहले ही कई नक्सली मुख्यधारा में लौट चुके हैं और सुरक्षाबलों की कार्रवाई से संगठन कमजोर हो रहा है।







