जगदलपुर, बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों की लंबी लड़ाई अब निर्णायक मुकाम पर पहुंच चुकी है। कभी नक्सली हिंसा के लिए पहचान रखने वाला बस्तर आज तेजी से शांति और विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है। हालांकि बीते वर्षों में हुई बड़ी नक्सली घटनाओं से जुड़े मामलों की न्यायिक प्रक्रिया अभी भी जारी है और इन्हीं मामलों की सुनवाई को गति देने के लिए जगदलपुर में एनआईए के विशेष न्यायाधीश की नियुक्ति की गई है।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और राज्य सरकार की सलाह पर राजपत्र में अधिसूचना जारी कर जिला सत्र न्यायालय में पदस्थ जज संगीता नवीन तिवारी को इस सेंट्रल एनआईए स्पेशल कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया है. केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट और राज्य सरकार की सिफारिश पर जगदलपुर में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत शुरू करने की अधिसूचना जारी कर दी है. इस महत्वपूर्ण कदम से बस्तर क्षेत्र में नक्सल हिंसा और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मामलों की स्थानीय स्तर पर त्वरित सुनवाई हो सकेगी, जिससे लंबे समय से लंबित पड़े प्रकरणों का जल्द निपटारा होने की उम्मीद है.
इस नई स्पेशल कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में बस्तर (जगदलपुर), दक्षिण बस्तर (दंतेवाड़ा), उत्तर बस्तर (कांकेर) और कोंडागांव सहित चार जिले शामिल किए गए हैं. हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के निर्देशों के बाद जगदलपुर जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर में इसके लिए सभी आवश्यक प्रशासनिक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं.
वर्तमान में इन चारों जिलों से जुड़े एनआईए के 21 मामले विचाराधीन हैं, जबकि लगभग 110 मामले रिमांड स्टेज पर हैं. राज्य सरकार ने कोर्ट में अभियोजन पक्ष का संचालन करने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता संजय शुक्ला और दिनेश पाणिग्राही को नियुक्त किया है, वहीं आरोपियों के बचाव के लिए भी वकीलों की तैनाती की गई है.
बस्तर के इतिहास में कुछ घटनाएं ऐसी हैं जिन्होंने पूरे देश को झकझोर दिया था। वर्ष 2013 का झीरम घाटी हमला, दंतेवाड़ा में भाजपा विधायक भीमा मंडावी की हत्या और नारायणपुर में भाजपा नेता की हत्या जैसे 12 मामले राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बने थे। इन घटनाओं की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने की और इनके प्रकरण विशेष अदालत में विचाराधीन हैं। अब तक इन मामलों की सुनवाई अलग-अलग व्यवस्थाओं के तहत चल रही थी, लेकिन विशेष जज की नियुक्ति के बाद एनआईए से जुड़े सभी महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई अधिक व्यवस्थित और तेज गति से होने की उम्मीद है।







