कांग्रेस और राहुल गांधी, वर्तमान परिप्रेक्ष्य में एक दूसरे के पर्यायवाची माने जा सकते है, इस बात में कांग्रेस सहित दीगर राजनैतिक दलों सहित देशवासियों को एतराज नहीं हो सकता है।
राजीव गांधी के आकस्मिक निधन के समय राहुल गांधी की उम्र महज चौदह साल थी ।राहुल से बड़ी प्रियंका थी लेकिन कांग्रेस में भविष्य राहुल में देखा था। मां सोनिया गांधी ने गांधी परिवार की परंपरा के रूप में विरासत संभाली थी इसके बावजूद ये माना जाता रहा कि समय आने पर देर सबेर राहुल ही अगले लम्बरदार होंगे।
2004 में राहुल 34 वर्ष के हो चुके थे। राजनीति के हिसाब उनकी उम्र दोनों सदन के सदस्य होने की हो चली थी। 14वी लोकसभा में अमेठी से लोकसभा के सांसद भी बन गए थे। राजनीति में उम्र के साथ साथ अनुभव बहुत मायने रखती है इसी कारण 2004 में सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री पद स्वीकार न कर मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनाया। राहुल सांसद ही रहे।
मनमोहन सिंह के दूसरे कार्यकाल में राहुल को मनचाहा मंत्री पद स्वीकार कर लेना था।ये राजनैतिक अनुभव की स्वीकार्यता होती। सत्ता के बजाय राहुल ने संगठन को प्रमुखता दी। 2017 में कांग्रेस के अध्यक्ष बने।इस दौर में देखे तो भारतीय राजनीति में नरेंद्र मोदी का धूमकेतु की तरह उदय हो चुका था।देश की राजनीति में हिंदुत्व का प्रभुत्व दिन ब दिन बढ़ते जा रहा था। धर्म निरपेक्षता का सिद्धांत दम तोड़ने लगा था। इस नैरेटिव को राहुल सहित कांग्रेस और दीगर राजनैतिक दल समझ नहीं सके।
2019 के आते आते नरेंद्र मोदी का कद इतना बढ़ गया था कि उनके नेतृत्व में भाजपा क 1989 के बाद, दूसरा ऐसा दल बनी जो लोकसभा में 272 के जादुई आंकड़े से आगे जाकर 282 और 303 सीट पर रुकी। कांग्रेस के लिए पराभव का दौर था। देश की सबसे बड़ी पार्टी को क्रमशः 44 और 52 सीट पर संतोष करना पड़ गया। 2019 के चुनाव परिणाम में कांग्रेस को मिली असफलता का दूसरा परिणाम ये भी रहा कि राहुल ने कांग्रेस अध्यक्ष का पद त्याग दिया।
2019 का साल राहुल के लिए अच्छा नहीं रहा। अमेठी से लोकसभा चुनाव हार गए। स्मृति ईरानी के हिस्से में बड़ी जीत आई। 2019 के बाद से राहुल अगले पांच साल तक बतौर युवराज कांग्रेस को सम्हालने की कोशिश करते रहे। 2022 में भारत जोड़ो यात्रा केरल से कश्मीर और 2024 में भारत न्याय यात्रा मणिपुर से महाराष्ट्र यात्रा से उनका दूसरा व्यक्तित्व सामने आया लेकिन कांग्रेस के अभूतपूर्व सफलता के लिए पर्याप्त नहीं रहा। 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने अमेठी की प्रतिष्ठा को पुनर्स्थापित किया लोकसभा चुनाव जीत कर।
लोकसभा में कांग्रेस तीसरी बाद तिहाई की सबसे छोटी संख्या सौ से एक कम 99 के फेर में रुकना पड़ गया। कांग्रेस जो 2014 और 2019 में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के लिए 54 सीट हासिल नहीं कर पा रही थी 2024 में इस विडंबना से बाहर निकल सफल हुई। वर्तमान में राहुल नेता प्रतिपक्ष है। इस नाते उनकी जिम्मेदारी सरकार के ऐसे कार्य जो जन विरोधी हो उनका सप्रमाण विरोध करना है। 2029 का लोक सभा चुनाव इसी बात की समीक्षा भी करेगा। अगले लोकसभा चुनाव के समय राहुल साठ साल के होने जा रहे होंगे। कांग्रेस राहुल को सत्ता में आने पर प्रधानमंत्री के रूप में पहली पसंदगी मानती है, जनमत इस पर मुहर लगाता है या नहीं? ये तीन साल बाद की बात है।
स्तंभकार-संजयदुबे






