रायपुर, छत्तीसगढ़ के रायपुर में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी कल एक दिन के दौरे पर पहुंचे। जहां उन्होंने कांग्रेस के संगठन सृजन प्रशिक्षण शिविर में हिस्सा लिया। अभनपुर में आयोजित इस कार्यक्रम में राहुल गांधी ने नवनियुक्त जिला और शहर कांग्रेस अध्यक्षों के साथ चर्चा की। उन्होंने पार्टी को मजबूत करने, बूथ स्तर पर पकड़ बढ़ाने और आगामी चुनावों की तैयारियों को लेकर जरूरी दिशा-निर्देश दिए। राहुल गांधी ने कार्यकर्ताओं से जनता के बीच जाकर उनकी समस्याओं को समझने और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाने पर जोर दिया।
एयरपोर्ट स्वागत को लेकर उठे सवाल
राहुल गांधी के रायपुर पहुंचने के दौरान एयरपोर्ट पर स्वागत को लेकर भी चर्चा तेज रही। कांग्रेस की ओर से सभी विधायकों को स्वागत के लिए बुलाए जाने की बात सामने आई, लेकिन मौके पर कुछ ही विधायक पहुंचे। इधर अभनपुर में कार्यक्रम स्थल के पहले चौक -चौराहों पर पूर्व मंत्री धनेंद्र साहू के समर्थकों ने बैनर-पोस्टर- झंडे हाथों में लेकर स्वागत किया। कार्यक्रम स्थल बैनर-पोस्टर से पट गाया है। हालाकि स्वागत को लेकर पार्टी के अंदर ही कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।
गुटबाजी खत्म करने पर राहुल का जोर
जानकारी के अनुसार, प्रशिक्षण कार्यक्रम में कांग्रेस के अंदर चल रही गुटबाजी का मुद्दा भी सामने आया। वरिष्ठ नेताओं ने संगठन में आपसी तालमेल की कमी को लेकर चिंता जताई। राहुल गांधी ने नेताओं को आपसी मतभेद खत्म कर पार्टी को मजबूत करने की बात कही। उन्होंने कहा कि जिला अध्यक्षों को बिना डर काम करना चाहिए और जनता से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी कार्यकर्ता या पदाधिकारी को कोई समस्या है तो वह सीधे अपनी बात रख सकता है।
डिजिटल मॉनिटरिंग से होगी जिला अध्यक्षों की परफॉर्मेंस जांच
राहुल गांधी ने जिला अध्यक्षों की जिम्मेदारियों को लेकर कहा कि अब संगठन की गतिविधियों की डिजिटल मॉनिटरिंग की जाएगी। बेहतर काम करने वाले पदाधिकारियों को आगे बड़ी जिम्मेदारी देने पर विचार किया जाएगा। उन्होंने 2028 के चुनावी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए बूथ और ब्लॉक स्तर पर संगठन को मजबूत करने का मंत्र दिया।
कांग्रेस के अंदर तेज हुई चर्चाएं
राहुल गांधी के दौरे के बाद कांग्रेस में संगठन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। पार्टी नेताओं के बीच गुटबाजी और कार्यकर्ताओं की सक्रियता जैसे मुद्दे भी सामने आए हैं। कांग्रेस का कहना है कि यह दौरा संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को नई दिशा देने के लिए किया गया है। वहीं राजनीतिक जानकार इसे आने वाले चुनावों की तैयारी से जोड़कर देख रहे हैं। पार्टी अब जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में जुटी है।






