
नईदिल्ली; देश की राजधानी समेत देश के अलग-अलग राज्यों में पिछले 2 महीनों के दौरान कई प्रदर्शन देखने को मिले. इनमें ज्यादातर प्रदर्शन मौजूदा शिक्षा प्रणाली और पेपर लीक के विरोध में हुए. प्रदर्शन के दौरान ही पुलिस ने लाठीचार्ज समेत कई उपाय आजमाए. ताकि किसी भी तरह प्रदर्शनकारियों को रोका जा सके. लेकिन, कुछ जगहों पर यह भी देखने को मिला कि पुलिस के चाहे सीनियर अधिकारी हो या फिर जूनियर सब प्रदर्शनकारियों को पीटते नजर आए. इस तरह की कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जवल भुइयां चिंता जाहिर की है.
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जल भुइयां ने कहा कि जब आईपीएस अधिकारी खुद प्रदर्शनकारियों पर हमला करते दिखाई देते हैं, तो यह बेहद दुखद है. उन्होंने कहा कि पुलिस से हमेशा से ही निष्पक्षता की उम्मीद की जाती है. लेकिन, आज वो कहीं न कहीं गायब दिख रही है. यही वजह है कि अब पुलिस को भी अपना रवैया बदलना होगा.

फर्जी एनकाउंटर गंभीर अपराध-जस्टिस उज्जवल
देशभर में पिछले कुछ सालों के भीतर एनकाउंटर के मामले बढ़े हैं. लोग कभी इस कार्रवाई को सही तो कभी एनकाउंटर को ही गलत बताते हैं. ऐसे कई मामले सामने आए जब एनकाउंटर को लेकर पुलिस ने जो कहानी बताई. वह कहीं से लेकर कहीं तक फिट नहीं बैठी. इसको लेकर भी जस्टिस उज्जल ने कहा कि कहा कि हिरासत में मौत और फर्जी एनकाउंटर गंभीर अपराध हैं.
आगे उन्होंने कहा कि सभ्य समाज में हिरासत में मौत बेहद गंभीर अपराध है. किसी भी स्थिति में पुलिस किसी व्यक्ति के साथ यातना या अमानवीय व्यवहार नहीं कर सकती है. उन्होंने सवाल किया कि क्या पुलिस की गिरफ्तारी के बाद किसी व्यक्ति का जीवन का अधिकार खत्म हो जाता है? उन्होंने कहा, इसका जवाब साफ है- नहीं.
पहले भी दे चुके हैं इस तरह के बयान
जस्टिस भुइयां की ये टिप्पणी के बाद देश में विरोध प्रदर्शनों से निपटने के तरीकों को लेकर चल रही बहस के बीच आई है.जस्टिस भुइयां की ये पहली टिप्पणी नहीं है, बल्कि वह हाल के दिनों में इस विषय पर कई बार बोल चुके हैं. कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि इस समय जिस तरह की पुलिसिया कार्रवाई देखने को मिल रही है. उससे सुप्रीम कोर्ट भी हैरान है.







