SC; सुको ने निर्वाचन आयोग से कहा-दोषी नेताओं की अयोग्यता को कम करने या हटाने का ब्योरा दें..

नईदिल्ली, एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तहत उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को भारत के निर्वाचन आयोग (ईसीआई) से उन मामलों का ब्योरा मांगा, जिनमें उसने आपराधिक मामलों में दोषी ठहराए जाने के बाद राजनीतिक नेताओं की मतदाता सूची से अयोग्यता की अवधि को या तो कम कर दिया है या हटा दिया है.

न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने चुनाव आयोग से दो सप्ताह के भीतर ऐसे मामलों का ब्योरा देने को कहा, जिनमें उसने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (आरपीए), 1951 की धारा 11 के तहत अपनी शक्ति का प्रयोग किया है. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत, आपराधिक मामलों में दोषी ठहराए जाने के बाद चुनावी राजनीति से अयोग्यता की अवधि अपराध और सजा के आधार पर अलग-अलग होती है.

दो या अधिक वर्षों के कारावास से संबंधित मामलों में किसी व्यक्ति को दोषी ठहराए जाने की तारीख से रिहाई के छह साल बाद तक अयोग्य घोषित किया जाता है, भले ही वह जमानत पर बाहर हो या अपील का इंतजार कर रहा हो. हालांकि, भारत के निर्वाचन आयोग (ईसीआई) को अधिनियम की धारा 11 के तहत कारणों को दर्ज करने के बाद अयोग्यता की अवधि को हटाने या कम करने का अधिकार है. पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय और अन्य निर्वाचन आयोग द्वारा विवरण प्रस्तुत किए जाने के दो सप्ताह के भीतर आयोग के जवाब पर प्रत्युत्तर दाखिल कर सकते हैं.

वर्ष 2016 में अधिवक्ता अश्विनी दुबे के माध्यम से दायर जनहित याचिका में देश में सांसदों और विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामलों के शीघ्र निपटारे के अलावा दोषी नेताओं पर आजीवन प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी. यह सूचित किए जाने पर कि गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) लोक प्रहरी की इसी तरह की याचिका लंबित है और दूसरी पीठ उस पर सुनवाई कर रही है, न्यायमूर्ति दत्ता ने उपाध्याय की जनहित याचिका को भारत के प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना को भेज दिया, ताकि उन्हें एक साथ जोड़कर एक अदालत के समक्ष सूचीबद्ध किया जा सके.

पीठ ने कहा कि प्रधान न्यायाधीश द्वारा प्रशासनिक आदेश दिए जाने के बाद मामलों को शीघ्रता से सूचीबद्ध किया जाना चाहिए. संक्षिप्त सुनवाई के दौरान, न्याय मित्र के रूप में पीठ की सहायता कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता विजय हंसारिया ने कहा कि दोषी ठहराए गए नेताओं की अयोग्यता में कमी या उसे हटाने का विवरण उपलब्ध नहीं है और इसे उपलब्ध कराया जाना चाहिए.

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने कहा कि राजनीति के अपराधीकरण को रोकने के लिए कदम उठाने की आवश्यकता है और निर्वाचन आयोग के हवाले से कहा कि आरोप-पत्र दाखिल किए गए व्यक्तियों को चुनावी राजनीति में प्रवेश करने से रोका जाना चाहिए. ईसीआई के अधिवक्ता ने कहा कि आयोग को उन मामलों का ब्योरा उपलब्ध कराने में कोई कठिनाई नहीं है, जिनमें निर्वाचन आयोग ने अयोग्यता की अवधि को कम करने या इसे हटाने के लिए अपने अधिकार का इस्तेमाल किया.

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