बिलासपुर, न्यायधानी में चर्चित सर्पदंश मुआवजा घोटाले में जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. कलेक्टर संजय अग्रवाल ने आरोपी नरेंद्र कुमार कौशिक, हरीश राठौर और गरीब दास बिंझवार के खिलाफ निलंबन का आदेश जारी किया है. ये तीनों कर्मचारी घोटाले की जांच के दायरे में आए थे.
बताया जा रहा है कि तीनों आरोपियों के खिलाफ पहले ही पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज की जा चुकी है. पुलिस की एफआईआर में नाम सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने यह कार्रवाई की है. प्रशासन का कहना है कि मामले की जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार आगे भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
यह मामला विधानसभा में उठने के बाद जिला प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की. नायब नाजिर की ओर से सिविल लाइन, सरकंडा, कोनी, कोतवाली, तोरवा और सिरगिट्टी थाना क्षेत्रों में फर्जी सर्पदंश से मौत के 15 मामलों में एफआईआर दर्ज कराई गई. इसके बाद एसएसपी रजनेश सिंह के निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पंकज पटेल के नेतृत्व में सभी मामलों की पुरानी फाइलों की दोबारा समीक्षा शुरू की गई.
ऐसे होता था फर्जीवाड़ा?
जांच में सामने आया कि इस पूरे रैकेट का कथित मास्टरमाइंड वकील हीराप्रसाद खांडेकर था. उसने अपने गिरोह में बैंककर्मी, तहसील कार्यालय से जुड़े लोगों और अन्य सहयोगियों को शामिल कर रखा था. किसी भी सामान्य मौत के बाद गिरोह के सदस्य मृतक के परिजनों से संपर्क करते थे और सर्पदंश से मौत दिखाकर सरकारी सहायता राशि दिलाने का प्रस्ताव देते थे। इसके बाद कथित रूप से फर्जी शपथपत्र, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य दस्तावेज तैयार कर तहसील कार्यालय में प्रक्रिया पूरी कराई जाती थी. साथ ही मुआवजा राशि प्राप्त करने के लिए बैंक खाता खुलवाने की व्यवस्था भी गिरोह द्वारा कराई जाती थी.







