नईदिल्ली, जस्टिस यशवंत वर्मा से जुड़े कैश कांड में जांच समिति की रिपोर्ट सामने आ चुका है. रिपोर्ट आने के बाद मामला एक बार फिर सुर्खियों में है. कैश कांड की पूरी रिपोर्ट 12 अगस्त 2026 को लोकसभा और राज्यसभा में पेश की गई. दो-वॉल्यूम रिपोर्ट में तीन सदस्यीय जांच समिति ने वर्मा के खिलाफ लगाए गए तीनों आरोपों को सही माना है. रिपोर्ट में मौखिक और दस्तावेजी सबूत भी शामिल हैं. अब मतलब यह भी तय हो चुका है कि आने वाले दिनों यशवंत वर्मा की मुसीबतें बढ़ सकती हैं.
कैश कांड का यह पूरा मामला 14 मार्च 2025 की रात का है, जब दिल्ली स्थित जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास में आग लगी थी. आग बुझाने पहुंचे दमकलकर्मियों को स्टोर रूम में बड़ी संख्या में ₹500 के जले और अधजले नोट मिले थे. जांच समिति के मुताबिक, नकदी की मौजूदगी, उसके स्रोत और मालिकाना हक को लेकर जस्टिस वर्मा संतोषजनक जवाब नहीं दे सके हैं.
क्या-क्या आरोप लगे यशवंत वर्मा पर?
यशवंत वर्मा पर पहला आरोप बेहिसाब नकदी रखने का लगा है. समिति ने माना कि स्टोर रूम में बड़ी मात्रा में नकदी मौजूद थी.v इतनी बड़ी रकम का वहां होना सामान्य तरीके से नजरअंदाज नहीं किया जा सकता था.
दूसरा आरोप वर्मा पर यह भी है कि उन्होंने सबूतों से छेड़छाड़ की है. रिपोर्ट के अनुसार आग के बाद स्टोर रूम को पर्याप्त तरीके से सुरक्षित और सील करने से पहले वहां सफाई और सामान हटाने की कार्रवाई हुई. इससे महत्वपूर्ण सबूत सुरक्षित नहीं रह सके. समिति ने इसे जांच के लिहाज से गंभीर माना है.
तीसरा आरोप वर्मा पर यह है कि उन्होंने जांच समिति की तरफ से पूछे गए सवालों का सही तरीके से जवाब नहीं दिया है. जस्टिस वर्मा ने बाद में यह संभावना जताई थी कि नकदी किसी साजिश के तहत रखी गई हो सकती है. हालांकि, समिति के सामने इन दावों के समर्थन में कोई FIR या ठोस शिकायत पेश नहीं की गई. पैनल ने उनके जवाब को प्रभाव में टालमटोल वाला, अधूरा और भ्रामक बताया है.
अब यशवंत वर्मा के खिलाफ आगे क्या?
जस्टिस वर्मा अप्रैल 2026 में इस्तीफा दे चुके हैं, इसलिए उनके खिलाफ संसद की हटाने की प्रक्रिया व्यावहारिक रूप से निष्प्रभावी हो गई है. हालांकि, 12 अगस्त की रिपोर्ट में एक अहम नया अपडेट यह है कि उनका इस्तीफा अभी तक कानून मंत्रालय की ओर से औपचारिक रूप से अधिसूचित नहीं हुआ था. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि नकदी से जुड़ी कथित साजिश के दावों के समर्थन में कोई ठोस सबूत नहीं मिला. अब इस रिपोर्ट के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या मामले में आपराधिक जांच या FIR की दिशा में कोई नई कार्रवाई होती है.







