नईदिल्ली, बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के खिलाफ चल रहा विरोध कम होने का नाम नहीं ले रहा है. कई जगहों पर वकीलों की तरफ से मनन मिश्रा का विरोध किया जा रहा है. सबकी केवल एक ही मांग है कि उनको अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए. जबकि इन सब मांगों पर मनन मिश्रा ने इस्तीफा देने से साफ इनकार कर दिया है.
अलग-अलग जगहों पर चल रहे विरोध प्रदर्शनों ने उनकी और बार काउंसिल की टेंशन बढ़ा दी है. तो वहीं दूसरी तरफ इस्तीफा न देने के पीछे की वजह भी मनन मिश्रा ने साफ कर दी है. उनका कहना है कि वह चुनाव के जरिए इस पद पर पहुंचे हैं. इस तरह दबाव में इस्तीफा नहीं देंगे.
दूसरी तरफ बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) में कथित कुप्रबंधन की जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की गई है. याचिका में मांग की गई है कि मनन मिश्रा को हटाया जाए.
क्या है असली विवाद की वजह?
पूरा विवाद कुछ दिन पहले एक फैसले के बाद शुरू हुआ. इसको लेकर बार काउंसिल ने आदेश जारी किया था. इस नोटिस में था कि NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के छात्र वकील के तौर पर नामांकन नहीं कर सकते हैं. इस आदेश के जरिए उनके नामांकन पर रोक लगाई थी. रोक लगाने के पीछे की वजह सीजेआई सूर्यकांत का विरोध करना बताया गया था. बार काउंसिल का आदेश जैसे ही सामने आया इसका विरोध शुरू हो गया.छात्रों के समर्थन में देशभर से लोग सामने आए. विरोध के बाद दबाव बना तो मनन मिश्रा को अपना जारी किया हुआ आदेश वापस लेना पड़ा. इसके साथ ही छात्रों से माफी भी मांगनी पड़ी.
बार काउंसिल के आदेश पर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत ने भी BCI पर कड़ी नाराजगी जताई थी. उन्होंने छात्रों के शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने के अधिकार का समर्थन किया. विरोध और इस्तीफे की मांग के बीच मनन मिश्रा ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है. उन्होंने कहा कि वह चुनकर इस पद पर आए हैं और इस्तीफा नहीं देंगे. उन्होंने वकीलों के लिए अपमानजनक शब्दों के इस्तेमाल पर भी आपत्ति जताई है.







