COURT; 15 साल की जेल के बाद निर्दोष बरी हुए माओवादी नेता आजाद, पुलिस जांच प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल

भुवनेश्वर। माओवादी नेता आजाद (डूना केशव राव) को अदालत ने सभी दर्ज मामलों में निर्दोष साबित करते हुए बरी कर दिया है। अदालत में पुलिस और जांच एजेंसियों द्वारा प्रस्तुत किए गए साक्ष्य पर्याप्त और ठोस साबित नहीं हो सके, जिसके चलते उन्हें लगभग 15 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद रिहा कर दिया गया है। 15 साल तक विचाराधीन कैदी के रूप में  जेल में समय बिताने के बाद उनकी रिहाई ने अब पुलिस की कार्यप्रणाली, जांच के स्तर और मामले के प्रबंधन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 

आजाद के समर्थकों और कानून विशेषज्ञों ने आरोप लगाया है कि उनके खिलाफ जानबूझकर साजिश रची गई थी और बिना ठोस सबूतों के उन्हें वर्षों तक सलाखों के पीछे रखा गया। 15 साल का लंबा समय जेल में बिताने के कारण उनके जीवन के कीमती वर्ष नष्ट हो गए, जिसकी भरपाई के लिए अब उचित मुआवजे की मांग जोर पकड़ रही है। वकीलों ने पुलिस की निष्पक्षता और जांच के तरीकों को कटघरे में खड़ा किया है।

अधिवक्ताओं के अनुसार, इस पूरे मामले की जांच के दौरान पुलिस द्वारा कई बुनियादी और प्रक्रियात्मक गलतियां की गईं: आरोपी की सही पहचान सुनिश्चित करने के लिए पहचान परेड आयोजित नहीं की गई। मामले से जुड़े जरूरी सबूतों और रिकॉर्ड्स को सही तरीके से एकत्र नहीं किया गया और न ही उनका सही रख-रखाव किया गया। केवल संदेह के आधार पर मामले दर्ज किए गए, लेकिन अदालत के समक्ष ठोस और वैज्ञानिक सबूत पेश करने में जांच एजेंसियां पूरी तरह विफल रहीं।

वकीलों का स्पष्ट कहना है कि केवल माओवादी विरोधी अभियानों के नाम पर मामले दर्ज कर देना काफी नहीं है। जब तक जांच एजेंसियां अदालत में पुख्ता साक्ष्य प्रस्तुत नहीं करतीं, तब तक कानूनी रूप से न्याय पाना संभव नहीं है। यह घटना केवल एक आरोपी की रिहाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह न्याय प्रणाली में सुधार, सबूत जुटाने की प्रक्रिया और किसी व्यक्ति को आरोपी बनाने से पहले पुलिस द्वारा की जाने वाली प्राथमिक जांच की गुणवत्ता पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है। इतने वर्षों की न्यायिक लड़ाई के बाद आजाद के निर्दोष साबित होने से अब जांच अधिकारियों की जवाबदेही तय करने पर बहस छिड़ गई है।

जेल से रिहा होने के बाद डूना केशव राव (आजाद) ने राहत की सांस ली। उन्होंने कहा कि 15 वर्षों के लंबे संघर्ष और कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार वे अपने घर लौट आए हैं। अपने परिवार के सदस्यों के साथ समय बिताकर वे बेहद खुश हैं। उन्होंने इच्छा व्यक्त की है कि वे आने वाले दिनों में समाज की मुख्यधारा में शामिल होकर एक साधारण और शांतिपूर्ण जीवन व्यतीत करेंगे।

  • Narayan Bhoi

    Narayan Bhoi is a veteran journalist with over 40 years of experience in print media. He has worked as a sub-editor in national print media and has also worked with the majority of news publishers in the state of Chhattisgarh. He is known for his unbiased reporting and integrity.

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