
रायपुर, छत्तीसगढ़ में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण महानदी, शिवनाथ और अरपा समेत कई नदियाँ और छोटे नाले उफान पर हैं, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। गरियाबंद, सरगुजा, अंबिकापुर और सूरजपुर जिलों में लगातार बारिश से नदी-नालों का जलस्तर काफी बढ़ गया है। महानदी और शिवनाथ नदी का पानी कई निचले इलाकों और तटीय गांवों में भर गया है। कई ग्रामीण इलाकों का संपर्क जिला मुख्यालयों से कट गया है तथा सड़कों पर जलभराव से यातायात प्रभावित हुआ है।
मौसम विभाग (IMD) ने कई जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है, और प्रशासन ने लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है। मौसम विभाग द्वारा आगे भी बारिश की संभावना जताए जाने से महानदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने की आशंका है, जिसे देखते हुए कलेक्टर ने तटीय और निचले इलाकों में स्थित गांवों के लिए हाई अलर्ट जारी कर दिया है।
गंगरेल से 4,670 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा
धमतरी जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से जनजीवन प्रभावित होने लगा है, वहीं क्षेत्र के सभी प्रमुख जलाशय अब पूरी तरह लबालब हो चुके हैं। कैचमेंट एरिया से हो रही पानी की भारी आवक को देखते हुए जिला प्रशासन के निर्देश पर गंगरेल बांध (रविशंकर सागर जलाशय) के तीन गेट खोल दिए गए हैं, जिनसे कुल 4,670 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। इसमें से 3,360 क्यूसेक पानी सीधे महानदी में बह रहा है, जबकि 1,410 क्यूसेक पानी रुद्री बैराज के रास्ते मुख्य नहर में प्रवाहित किया जा रहा है।
बांध- तालाब लबालब
वर्तमान में धमतरी जिले के जलाशयों की स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। मुरूमसिल्ली जलाशय अपनी क्षमता का 98.61 प्रतिशत भर चुका है और उसमें 362 क्यूसेक पानी की आवक बनी हुई है। वहीं गंगरेल जलाशय 97.40 प्रतिशत भरकर 3,365 क्यूसेक आवक दर्ज कर रहा है। इसके अलावा दुधावा जलाशय 86.86 प्रतिशत (437 क्यूसेक आवक) और सोंढूर जलाशय 69.25 प्रतिशत (167 क्यूसेक आवक) तक भर चुके हैं। जलाशयों में लगातार बढ़ते पानी के दबाव को नियंत्रित करने के लिए ही महानदी में जलप्रवाह बढ़ाया गया है।
24 घंटे सतर्क रहने की हिदायत
बढ़ते जलस्तर और बाढ़ के खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद हो गया है। कलेक्टर धमतरी ने अधिकारियों और मैदानी को 24 घंटे सतर्क रहने और संवेदनशील क्षेत्रों पर लगातार निगरानी रखने के सख्त निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे नदी, नालों और जलभराव वाले इलाकों के पास न जाएं तथा उफनती नदी को पार करने का जोखिम बिल्कुल न उठाएं। तटीय गांवों में मुनादी कराकर लोगों को सतर्क किया जा रहा है, ताकि जरूरत पड़ने पर निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों को समय रहते सुरक्षित एवं ऊंचे स्थानों पर बनाए गए राहत केंद्रों में पहुंचाया जा सके। इसके साथ ही नागरिकों से किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न देकर केवल अधिकृत प्रशासनिक सूचनाओं पर ही भरोसा करने का आग्रह किया गया है।







