रायपुर, रायपुर नगर निगम की सीमा के भीतर लोगों को मूलभूत सुविधाएँ प्रदान करने में अग्रणी रायपुर नगर निगम के ठेकेदारों को महीनों से भुगतान पर पूर्ण रोक लगने के कारण उनके समक्ष दिनचर्या के खर्चों के लिए लेनदारों का सामना करना पड़ रहा है। भुगतान के अभाव में लगभग सभी विकास कार्य ठप पड़े हुए हैं।आयुक्त, महापौर तथा नेता प्रतिपक्ष सहित सभी जनप्रतिनिधियों के समक्ष ठेकेदार अपनी गुहार लगाकर थक चुके हैं, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन ही मिल रहा है। भुगतान रोकने के विरोध में 6 जुलाई सोमवार को समस्त ठेकेदारों ने काम बंद करने का निर्णय लिया है।
ठेकेदार संघ के अध्यक्ष दुर्गेश सिंह ठाकुर ने बाताया है कि विगत कुछ महीनों से, जब से नए आयुक्त का निगम में आगमन हुआ है, तब से ऐसा प्रतीत होता है कि ठेकेदारों के बिल भुगतान की फाइलों को मानो लकवा मार गया हो। नए आयुक्त द्वारा फाइलों में गति लाने की मंशा से ई-फाइलिंग सिस्टम को अनिवार्य किया गया, किंतु नगर निगम के कुछ अधिकारी इस व्यवस्था को विफल करने में लगे हुए हैं। उन्हें ई-फाइलिंग से अपना व्यक्तिगत नुकसान दिखाई दे रहा है। यदि ई-फाइलिंग प्रणाली सफल हो गई, तो फाइलें लटकाने के बदले मिलने वाला पैसा कौन देगा?
स्थिति और भी गंभीर तब हो गई जब नगर निगम में राज्य शासन द्वारा आंतरिक अंकेक्षण (ऑडिट) के लिए सबसे भ्रष्ट कंपनी को ठेके पर नियुक्त कर दिया गया। उसके कम पढ़े-लिखे कर्मचारी ठेकेदारों की फाइलों को बिना पूरी तरह देखे ही आपत्तियाँ लगा रहे हैं। इसका एकमात्र कारण यही प्रतीत होता है कि ठेकेदार देयक पास कराने के लिए उन्हें चढ़ावा देना शुरू करें। वे केवल अधिकारियों के दबाव वाले देयकों को ही पारित कर रहे हैं।
ठेकेदार, जो पहले से ही कर्ज लेकर व्यवसाय करते हैं और मामूली मुनाफे पर जैसे-तैसे अपना घर चलाते हैं, उनका भविष्य अंधकारमय दिखाई देने लगा है। हताशा और चिंता उन पर हावी होती जा रही है। लेनदारों की लगातार मांग, घर का खर्च, बच्चों की फीस, बुजुर्गों की देखभाल, दवाइयाँ आदि का प्रबंधन उनके लिए पहाड़ जैसा कठिन हो गया है।






