CRICKET; नक्सल बेल्ट की पगडंडियों से UAE टीम तक शोएब खान की उड़ान, खेलेंगे T20 वर्ल्ड कप

0 बिहार के छोटे से गांव के लड़के की बड़ी कहानी
गया. बिहार के गया जिले का नाम सुनते ही अक्सर ज़हन में बोधगया की शांति या फिर इमामगंज जैसे इलाकों का नक्सली इतिहास उभरता है. लेकिन आज इमामगंज का ‘कोठी’ गांव एक अलग वजह से सुर्खियां बटोर रहा है. इस छोटे से गांव के रहने वाले 27 वर्षीय शोएब खान ने वह कर दिखाया है जो बिहार के क्रिकेट इतिहास में विरले ही होता है. शोएब का चयन 2026 ICC पुरुष T20 विश्व कप के लिए संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की राष्ट्रीय टीम में हुआ है. UAE टीम का पहला मुकाबला 10 फरवरी को चेन्नई में न्यूज़ीलैंड के खिलाफ होगा. इसके बाद UAE टीम कनाडा, अफगानिस्तान और साउथ अफ्रीका के खिलाफ मुकाबले खेलेगी. ेउन्होंने कहा कि कड़ी मेहनत और धैर्य से ही सफलता मिलती है और उन्होंने सभी से आगे भी बेहतर प्रदर्शन के लिए दुआ करने की अपील की. शोएब खान की कहानी एक ऐसे खिलाड़ी की है, जिसने सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में जगह बनाई. UAE टीम में चयन के बाद शोएब खान ने गया और बिहार के युवाओं के लिए संदेश दिया.
पिता की जिद और 100 किलोमीटर का सफर
शोएब की सफलता के पीछे उनके पिता अदीब खान उर्फ जुगनू खान का बड़ा हाथ है. जुगनू खान पेशे से किसान और सामाजिक कार्यकर्ता हैं. जब शोएब ने बचपन में बल्ले से कमाल दिखाना शुरू किया तो गांव में सुविधाओं का घोर अभाव था. जुगनू खान अपने बेटे को अपनी पुरानी बाइक पर बिठाकर रोजाना गया के गांधी मैदान ले जाते थे जो उनके घर से लगभग 50 किलोमीटर दूर था. यानी आने-जाने का 100 किलोमीटर का सफर उनके जुनून की पहली परीक्षा थी. जब गांव के लोगों ने खेल को समय की बर्बादी बताया तो पिता ने अपने ही खेत के एक हिस्से को पिच में तब्दील कर दिया ताकि बेटा अभ्यास कर सके.
रणजी में रिजेक्शन और क्रिकेट छोड़ने का फैसला
शोएब खान की कहानी सिर्फ सफलता की नहीं, बल्कि संघर्ष और अपमान से उबरने की भी है. साल 2019 में शोएब ने बिहार की रणजी टीम के लिए ट्रायल दिया था. स्थानीय स्तर पर ढेरों रन बनाने के बावजूद जब उनका चयन नहीं हुआ तो वे बुरी तरह टूट गए थे. शोएब बताते हैं कि एक वक्त ऐसा आया था जब उन्होंने क्रिकेट के किट बैग को कोने में रख दिया था और पिता के साथ खेती करने का मन बना लिया था. लेकिन तकदीर को कुछ और ही मंजूर था.
शोएब दिल्ली आए और जामिया मिलिया इस्लामिया में दाखिला लिया. वहां उन्होंने अपनी कप्तानी में जामिया की टीम को कई टूर्नामेंट जिताए. इसी दौरान किसी शुभचिंतक ने उन्हें दुबई में क्रिकेट के मौकों के बारे में बताया. शोएब ने जोखिम लिया और यूएई चले गए. वहां की घरेलू क्रिकेट और लीग मैचों में उन्होंने रनों का अंबार लगा दिया. उनकी आक्रामक बल्लेबाजी और तकनीक ने यूएई के चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा और आखिरकार उन्हें नागरिकता और राष्ट्रीय टीम में जगह मिल गई.
वीरेंद्र सहवाग के बाद जामिया का दूसरा सितारा
दिलचस्प तथ्य यह है कि शोएब खान पूर्व भारतीय दिग्गज वीरेंद्र सहवाग के बाद जामिया मिलिया इस्लामिया के दूसरे ऐसे पूर्व छात्र हैं, जिन्होंने टी20 विश्व कप जैसे बड़े मंच तक का सफर तय किया है. वे ईशान किशन के बाद बिहार के दूसरे ऐसे खिलाड़ी हैं जो इस ग्लोबल टूर्नामेंट में नजर आएंगे.
रोहित शर्मा के हैं प्रशंसक, उन्हीं के खिलाफ उतरने की तैयारी
शोएब भारतीय कप्तान रोहित शर्मा को अपना आदर्श मानते हैं. दुबई में एशिया कप के दौरान उन्हें रोहित शर्मा से मिलने और बल्लेबाजी के गुण सीखने का मौका मिला था. आज स्थिति यह है कि वे उसी टूर्नामेंट का हिस्सा हैं, जिसमें रोहित शर्मा की कप्तानी वाली भारतीय टीम खेल रही है. शोएब का लक्ष्य है कि वे अपनी बल्लेबाजी से दुनिया को दिखा सकें कि बिहार की मिट्टी में कितना हुनर है.
2026 विश्व कप का शेड्यूल- दिल्ली और चेन्नई में दिखेगा जलवा
2026 टी20 विश्व कप में यूएई की टीम ग्रुप-ए में है. शोएब के लिए सबसे भावुक पल तब होगा जब वे भारत की धरती पर अपनी टीम का प्रतिनिधित्व करेंगे. यूएई का पहला मैच 10 फरवरी 2026 को चेन्नई में न्यूजीलैंड के खिलाफ है. इसके बाद उनकी टीम दिल्ली में कनाडा (13 फरवरी), अफगानिस्तान (16 फरवरी) और दक्षिण अफ्रीका (20 फरवरी) से भिड़ेगी. दिल्ली शोएब के लिए दूसरे घर जैसी है, जहां उन्होंने अपने कॉलेज के दिन बिताए हैं.
गांव में जश्न का माहौल
गया के इमामगंज और कोठी गांव में इस समय दिवाली जैसा माहौल है. पिता जुगनू खान कहते हैं, “मेरे बेटे ने साबित कर दिया कि अगर इरादे पक्के हों तो नक्सल प्रभावित इलाकों की गरीबी और बंदिशें भी रास्ता नहीं रोक सकतीं.” शोएब की यह सफलता बिहार के उन हजारों युवाओं के लिए उम्मीद की नई किरण है जो सिस्टम की कमियों की वजह से अपने सपनों को दम तोड़ते देखते हैं.
शोएब खान की उड़ान का संदेश
शोएब खान की कहानी एक छोटे बिहार के गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की बड़ी स्टेज तक पहुंचने वाले युवा खिलाड़ी की प्रेरणादायक कहानी है. अपने कठिन संघर्ष, परिवार के समर्थन और लगातार मेहनत से उन्होंने वह मुकाम हासिल किया है जहां वे T20 World Cup 2026 में खेलेंगे. उनकी यात्रा न केवल क्रिकेट प्रेमियों बल्कि हर युवा के लिए एक प्रेरणा है कि कठिन समय में भी अगर दृढ निश्चय हो तो सपने सच होते हैं.




