भुवनेश्वर, दुनिया में ‘दुर्लभ ब्लैक टाइगर’ की एक तस्वीर ने सबको रोमांचित कर रखा है। जंगल में बाघिन के साथ घूमते तीन काले बाघ शावकों की तस्वीर इंटरनेट पर खूब वायरल हो रही है। इसे इसलिए यूनिक बताया जा रहा है, क्योंकि इसके पहले कभी भी चार काले बाघ एक साथ नजर नहीं आए थे, जबकि इस तस्वीर में एक ही फ्रेम में उन्हें एक फॉरेस्ट अधिकारी ने कैमरे में कैद करने में सफलता पाई है। यह तस्वीर उड़ीसा के सिमिलिपाल नेशनल पार्क में ली गई है।
ओडिशा के मयूरभंज जिले में स्थित प्रसिद्ध सिमिलिपाल टाइगर रिजर्व से एक ऐसी जादुई तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरी दुनिया के वन्यजीव प्रेमियों को चौंका दिया है। सोशल मीडिया पर भारतीय वन सेवा के अधिकारियों द्वारा साझा की गई इस तस्वीर में एक बेहद दुर्लभ स्यूडो-मेलानिस्टिक यानी काली बाघिन अपने तीन नन्हे काले शावकों के साथ घने जंगलों में घूमती दिखाई दे रही है। बताया जा रहा है कि भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी परवीन कासवान ने अपने कैमरे में एक ऐसा नजारा कैद किया है।
पूरी दुनिया में ब्लैक टाइगर केवल भारत के उड़ीसा प्रांत के सिमिलिपाल नेशनल पार्क में ही पाए जाते हैं।टाऐगर सफारी के दौरान कभी कभार एक साथ काले बाघ देखने को मिलते है। वायरल तस्वीर में दुनिया की सबसे दुर्लभ काली बाघिन (स्यूडो-मेलानिस्टिक) अपने तीन नन्हे काले शावकों के साथ चहलकदमी करती नजर आ रही है। इस तस्वीर ने पूरी दुनिया का ध्यान ओडिशा के मयूरभंज जिले की तरफ खींचा है।
सिमलीपाल से आई रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक साल में यहां रिकॉर्ड 16 बाघ के बच्चों (शावकों) का जन्म हुआ है। हाल ही में महाराष्ट्र से लाई गई जीनत नामक बाघिन ने भी 4 नए शावकों को जन्म देकर इस कुनबे को बढ़ाया है। ताजा वन्यजीव गणना के अनुसार, अब इस रिजर्व में बाघों की कुल आबादी 32 से 40 के बीच पहुंच गई है, जो ओडिशा के पर्यावरण और वन्यजीव प्रबंधन के लिए एक बहुत बड़ी ऐतिहासिक जीत है। आखिर क्यों काले होते हैं ये बाघ?
वैज्ञानिक रूप से इन्हें कोई अलग प्रजाति नहीं माना जाता, बल्कि ये रॉयल बंगाल टाइगर का ही एक हिस्सा हैं। इनके शरीर में एक दुर्लभ, अप्रभावी आनुवंशिक दोष होता है, जिसे ‘Taqpep जीन’ का उत्परिवर्तन कहा जाता है। इस आनुवंशिक बदलाव के कारण इनके शरीर का सामान्य नारंगी रंग छिप जाता है और चौड़ी, आपस में जुड़ी हुई काली धारियां पूरे शरीर पर फैल जाती हैं। सिमिलिपाल दुनिया का एकमात्र ऐसा प्राकृतिक आवास है, जहां बाघों की लगभग 37% आबादी इस अनूठी आनुवंशिक विशेषता (स्यूडो-मेलानिस्टिक) के साथ जीती है। वर्तमान में यहां 13 से अधिक काले बाघ मौजूद हैं।
सिमिलिपाल नेशनल पार्क
उड़ीसा के मयूरभंज 2,750 वर्ग किलोमीटर में फैला यह विशाल बायोस्फीयर रिजर्व केवल बाघों के लिए ही नहीं, बल्कि ऊंचे साल के जंगलों, लुभावने झरनों और हाथियों के लिए भी जाना जाता है। प्रमुख आकर्षण विवरण बरेहीपानी जल प्रपात भारत के सबसे ऊंचे और खूबसूरत झरनों में से एक है। जोरंदा जलप्रपात वन्यजीव विविधता बंगाल टाइगर, एशियाई हाथी, तेंदुए, गौर और सैकड़ों पक्षी प्रजातियां सहित तमाम वाइल्ड लाइफ मौजूद है। इसे यूनेस्को द्वारा 2009 में मान्यता दी गई थी।







