बिलासपुर, छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी और लू (हीटवेव) का कहर वन्यजीवों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। तापमान 45°C के पार जाने और जलस्रोत सूखने से खैरागढ़, कांकेर, मरवाही और कोरबा में सैकड़ों पक्षियों, चमगादड़ों और एक मादा भालू की हीट स्ट्रोक से मौत हो गई है। मरवाही वनमंडल के जंगल में हीट स्ट्रोक से पांच वर्ष की एक मादा भालू की मौत का मामला सामने आया है। घटना के बाद वन विभाग में हड़कंप मच गया है और जंगल में वन्य प्राणियों के लिए उपलब्ध कराई गई सुविधाओं पर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि विभाग का दावा है कि जंगल में पर्याप्त जलस्त्रोत और पेयजल व्यवस्था उपलब्ध है। भालू की मौत ने बढ़ते तापमान के बीच वन्यजीवों की सुरक्षा और संरक्षण को लेकर नई चिंता खड़ी कर दी है।
रविवार को मरवाही रेंज के पिपरिया गांव से लगे जंगल के कक्ष क्रमांक 1975 में एक मादा भालू का शव मिलने से वन विभाग में हड़कंप मच गया। जानकारी के अनुसार कुछ ग्रामीण जंगल की ओर गए थे, तभी उनकी नजर भालू के शव पर पड़ी। इसके बाद उन्होंने तत्काल वन विभाग को सूचना दी। हैरानी की बात यह रही कि विभाग के मैदानी अमले को घटना की जानकारी तक नहीं थी।
सूचना मिलते ही वन अमला मौके पर पहुंचा और सावधानीपूर्वक शव का परीक्षण किया। इसके बाद भालू के शव को कब्जे में लेकर उच्चाधिकारियों को सूचित किया गया। अधिकारी भी घटनास्थल पहुंचे और मामले की जांच शुरू की। प्रारंभिक तौर पर मौत के कारण स्पष्ट नहीं हो सके थे। पंचनामा कार्रवाई के बाद पोस्टमार्टम के लिए पशु चिकित्सक को बुलाया गया। पीएम रिपोर्ट में चिकित्सक ने मादा भालू की मौत का कारण हीट स्ट्रोक बताया।लू की चपेट में आने से वन्य प्राणी की मौत की पुष्टि होने पर वन विभाग सकते में आ गया। एसडीओ की मौजूदगी में मृत मादा भालू का अंतिम संस्कार किया गया। विभागीय अधिकारियों के अनुसार मृत भालू की उम्र करीब पांच वर्ष थी।
प्रमुख घटनाएं और प्रभावित क्षेत्र
खैरागढ़: दल्लीखोली-लछना जंगल में 1 मोर, 2 मोरनियां, 3 पाम सिवेट सहित 15 से अधिक वन्यजीवों और दुर्लभ पक्षियों की एक साथ मौत हुई。
कांकेर और कोरबा: सरोना गांव (कांकेर) और पाली (कोरबा) में लू के कारण 700 से ज्यादा चमगादड़ मृत पाए गए。
मरवाही: भीषण गर्मी और डिहाइड्रेशन (निर्जलीकरण) के चलते एक मादा भालू की मौत हो गई.







