बिलासपुर, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शादी का झांसा देकर बनाए गए शारीरिक संबंधों को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि महिला बालिग है, और उसकी सहमति से शारीरिक संबंध बने हैं, तो इसे दुष्कर्म नहीं माना जा सकता. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जस्टिस एनके व्यास की एकल पीठ ने इस मामले में ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई सजा को अवैध ठहराते हुए आरोपी युवक को बरी कर दिया. यह मामला सरगुजा जिले के धौरपुर थाना क्षेत्र से जुड़ा है, जिसमें करीब 20 साल बाद आरोपी को राहत मिली है.
अदालत में पेश रिकॉर्ड के अनुसार, सरगुजा जिले की एक युवती वर्ष 2000 में 12वीं कक्षा की छात्रा थी और पढ़ाई के दौरान धौरपुर क्षेत्र में किराए के मकान में रहती थी. उसी दौरान उसकी मुलाकात लीना राम ध्रुव से हुई, जो वहां पढ़ाई कर रहा था. इस बीच दोनों के बीच दोस्ती हुई और धीरे-धीरे यह रिश्ता प्रेम संबंध में बदल गया. युवती का आरोप था कि 8 सितंबर 2000 को युवक ने शादी का झांसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए और इसके बाद करीब तीन साल तक संबंध जारी रहे.
पत्नी की तरह रखा, फिर छोड़कर चला गया
युवती के अनुसार, पढ़ाई पूरी होने के बाद दोनों अपने-अपने गांव लौट गए, लेकिन मुलाकातें जारी रहीं. युवती कुछ समय के लिए युवक के घर भी रही, जहां उसे पत्नी की तरह रखा गया. बाद में जब युवती ने शादी का प्रस्ताव रखा तो युवक अचानक उसे छोड़कर कहीं चला गया. युवती करीब दो महीने तक उसके घर पर रही, लेकिन वह वापस नहीं लौटा. इसके बाद उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई.
ट्रायल कोर्ट ने सुनाई थी 7 साल की सजा
पुलिस ने मामले में आरोपी लीना राम ध्रुव के खिलाफ दुष्कर्म का अपराध दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया और न्यायालय में पेश किया. मामले की सुनवाई के बाद अंबिकापुर के जिला एवं सत्र न्यायालय ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए 7 साल की सजा और 5000 रुपये जुर्माना लगाया था.
हाई कोर्ट ने पलटा फैसला
सत्र न्यायालय के फैसले को आरोपी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी. सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट का दोषसिद्धि आदेश कानून के अनुरूप नहीं है, इसलिए उसे निरस्त किया जाता है. अदालत ने अपने आदेश में कहा कि घटना के समय पीड़िता की उम्र 26 वर्ष थी और उसे शारीरिक संबंधों के परिणामों की पूरी जानकारी थी. ऐसे में संबंध सहमति से बने माने जाएंगे.
हर मामला दुष्कर्म नहीं
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल शादी का बहाना बनाकर बनाए गए संबंध हर परिस्थिति में दुष्कर्म नहीं माने जा सकते. यदि अभियोजन यह साबित नहीं कर पाता कि आरोपी ने शुरू से ही केवल शारीरिक शोषण के उद्देश्य से संबंध बनाए थे और उसका शादी करने का कोई इरादा नहीं था, तो ऐसे मामलों में दुष्कर्म का अपराध सिद्ध नहीं माना जाएगा.
20 साल बाद आरोपी को मिली राहत
इस मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने आरोपी को 27 अगस्त 2004 को गिरफ्तार किया था. 23 अगस्त 2005 को ट्रायल कोर्ट ने सजा सुनाई थी और 23 जनवरी 2006 को आरोपी को जमानत मिली. लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अब करीब दो दशक बाद हाईकोर्ट ने आरोपी को दोषमुक्त कर दिया है.







