
संबलपुर, ओडिशा के बरगढ़ जिले की रहने वाली तनिषा अग्रवाल ने इतिहास रच दिया है। वह जिले की पहली ऐसी महिला बन गई हैं, जिन्होंने कमर्शियल पायलट लाइसेंस (CPL) हासिल किया है। स्कूल की पढ़ाई के बाद एक सही करियर की तलाश से शुरू हुआ उनका यह सफर आज उन्हें विमान के कॉकपिट तक ले आया है।
तनिषा का एविएशन क्षेत्र में जाना पहले से तय नहीं था। 12वीं की पढ़ाई के बाद जब वह अलग-अलग करियर विकल्पों की तलाश कर रही थीं, तब उनकी नजर कमर्शियल पायलट के पेशे पर पड़ी। उन्होंने इस क्षेत्र के बारे में गहन रिसर्च करना शुरू किया। जैसे-जैसे उन्हें इस इंडस्ट्री के बारे में अधिक जानकारी मिली, उनका रुझान उड़ानों की ओर बढ़ता चला गया।

तनिषा ने बताया, “मैंने जितनी ज्यादा रिसर्च की, मुझे यह इंडस्ट्री उतनी ही पसंद आने लगी। इसके बाद मैंने फैसला किया कि मैं 12वीं के बाद इसी क्षेत्र में अपना करियर बनाऊंगी।” तनिषा ने 2021 में अपनी 12वीं की पढ़ाई पूरी की और 2022 से पायलट बनने की ट्रेनिंग शुरू कर दी। भारत में शुरुआती थ्योरी की परीक्षाएं पास करने के बाद वह व्यावहारिक उड़ान प्रशिक्षण के लिए अमेरिका के कैलिफोर्निया चली गईं।
कैलिफोर्निया में उन्होंने लगभग डेढ़ साल का समय बिताया, जहां उन्होंने छोटे विमान उड़ाने का अनुभव प्राप्त किया और आवश्यक फ्लाइंग आवर्स व ट्रेनिंग शर्तों को पूरा किया। भारत लौटने के बाद, उन्हें नागरिक उड्डयन महानिदेशालय से कमर्शियल पायलट लाइसेंस प्राप्त हुआ।लाइसेंस हासिल करना तनिषा के लिए अंतिम पड़ाव नहीं है। वह अब इंडिगो एयरलाइंस के साथ एयरबस विमान उड़ाने की विशेष ट्रेनिंग के लिए तैयारी कर रही हैं।
ट्रेनिंग के दौरान इस्तेमाल होने वाले छोटे विमानों से विशालकाय कमर्शियल विमानों की ओर कदम बढ़ाना उनके लिए एक नया अनुभव होगा। तनिषा का कहना है, “ट्रेनिंग के दौरान हम छोटे प्लेन उड़ाते थे। अब इंडिगो के साथ मेरी एयरबस ट्रेनिंग शुरू होने वाली है। छोटे विमान से बड़े विमान में स्विच करना अपने आप में एक बड़ी चुनौती है।तनिषा ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को दिया है। उन्होंने कहा कि इस लंबे और कठिन सफर में उनके माता-पिता उनका सबसे बड़ा सहारा रहे। तनिषा की इस ऐतिहासिक उपलब्धि से उनके परिवार, दोस्तों और रिश्तेदारों में खुशी का माहौल है।
अपनी इस उपलब्धि के जरिए तनिषा अन्य युवाओं, विशेषकर लड़कियों को यह संदेश देना चाहती हैं कि कोई भी लक्ष्य केवल लड़कों के लिए सीमित नहीं होता। उनका मानना है कि दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत के बल पर पारंपरिक रूप से पुरुषों के वर्चस्व वाले क्षेत्रों में भी सफलता हासिल की जा सकती है।







