NCERT; नई बुक में ‘इमरजेंसी’, शिक्षा मंत्री बोले- युवा पीढ़ी को पता होने चाहिए आपातकाल के काले कारनामे,भड़की कांग्रेस

नईदिल्ली,  भारत में लोकतंत्र का काला दौर कहे जाने वाले 1975-77 के आपातकाल को 50 साल पूरे हो गए हैं। 25 जून 1975 में इमरजेंसी की घोषणा की गई थी। संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत देश में इमरजेंसी की घोषणा की गई थी। आजादी के बाद यह भारतीय इतिहास की सबसे उथल-पुथल भरी घटनाओं में एक थी। एनसीईआरटी , इसे भारतीय लोकतंत्र के सामने आई सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक के तौर पर 9वीं क्लास के बच्चों के सिलेबस में शामिल करने जा रही है। कांग्रेस समेत दूसरे विपक्षी दलों के नेताओं ने इस फैसले को लेकर केंद्र और एनसीईआरटी पर सवाल उठाए हैं।

9वीं क्लास से बच्चों को पढ़ाया जाएगी ‘इमरजेंसी’

एनसीईआरटी ने पहली बार 1975-77 की इमरजेंसी को 9वीं क्लास की बुक में शामिल किया है। न्यूज एजेंसी एएनआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, 9वीं की सोशल साइंस की नई बुक ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ में पहली बार सेकेंडरी स्कूल के सिलेबस में इमरजेंसी का जिक्र किया गया है। एक अधिकारी ने बताया कि क्लास 9 की पिछली किताब में इमरजेंसी को शामिल नहीं किया गया था, लेकिन बदले हुए सिलेबस में इसके लिए एक अलग सेक्शन जोड़ा गया है।

शिक्षा मंत्री बोले- नई पीढ़ी को आपातकाल के काले कारनामे पता होने चाहिए

NCERT द्वारा कक्षा 9 की बुक में ‘आपातकाल’ (Emergency) पर एक चैप्टर शामिल किए जाने पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, ‘यह सही है। NCERT ने बिल्कुल सही किया है। आने वाली पीढ़ियों को आपातकाल के काले कारनामों के बारे में पता होना चाहिए और उन्हें समझना चाहिए, ताकि ऐसी स्थिति दोबारा न बने। इसीलिए NCERT ने इसे सामने रखा है। NCERT ने अच्छा काम किया है।’

9वीं की सोशल साइंस बुक में क्या-क्या है?

बताया है कि ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ के चैप्टर में इमरजेंसी को लोकतांत्रिक ताकतों और कमजोरियों के बारे में पढ़ाया जाएगा। बुक में 1970 के दशक की शुरुआत के राजनीतिक असंतोष- जिसमें आर्थिक तंगी, बेरोजगारी और इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली सरकार से बढ़ती निराशा और उसके बाद हुई घटनाओं की की जानकारी दी जाएगी।इसके अलावा इमरजेंसी के दौरान फेक न्यूज, गलत जानकारी, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान, गरीबी, क्षेत्रवाद, जातिगत भेदभाव और लैंगिक असमानता जैसे मुद्दों के साथ जोड़ा गया है।

‘इंदिरा गांधी की इमरजेंसी’ पर क्या बताया गया है?

बुक में इमरजेंसी के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को लेकर बताया कि 1970 के दशक की शुरुआत में, इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली सरकार से लोग खुश नहीं थे। बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और कई खराब नीतियों के आरोपों की वजह से बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। भारत में लोकतंत्र के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक तब आई जब 1975-77 में इमरजेंसी लागू की गई।

इमरजेंसी काल में सरकार ने क्या किया?

9वीं की बुक में आगे कहा गया है, ‘जून 1975 में, सरकार ने आंतरिक अशांति के आधार पर नेशनल इमरजेंसी लागू की। इस दौरान, ज्यादातर मौलिक अधिकारों को सस्पेंड कर दिया गया, प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई और कई राजनीतिक नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करके जेल में डाल दिया गया। लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भारी दबाव पड़ा और नागरिकों की आजादी सीमित कर दी गई।’

जेपी नारायण को बताया लोक नायक

एनसीईआरटी  की 9वीं की नई बुक में जयप्रकाश नारायण को लोक नायक बताया गया है। नए चैप्टर में उन्हें अहमियत देते हुए एक वरिष्ठ समाजवादी नेता और ‘लोक नायक’ के नाम से मशहूर बताया गया है। किताब में कहा गया है, ‘लोक नायक के नाम से मशहूर राजनीतिक नेता और समाजवादी विचारक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चले जन-आंदोलनों ने छात्रों और नागरिकों, खासकर बिहार और गुजरात में, लोगों को एकजुट किया। 1977 में इमरजेंसी हटाई गई और आम चुनाव हुए, जिससे लोगों को वोट के जरिए अपनी राय जाहिर करने का मौका मिला। सत्ताधारी सरकार की हार ने भारतीय लोकतंत्र की ताकत दिखाई और लोकतंत्र के महत्व को उजागर किया।’

विपक्ष का आरोप- इतिहास को राजनीतिक नजरिए से पेश करने की कोशिश

वहीं विपक्षी दलों का आरोप है कि शिक्षा और इतिहास को राजनीतिक नजरिए से पेश करने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस सांसद जेबी माथेर ने कहा कि क्या NCERT को यह याद है कि देश की आजादी की लड़ाई में महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू, मौलाना अबुल कलाम आजाद, सरदार वल्लभभाई पटेल और सुभाष चंद्र बोस जैसे नेताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अब इन सभी नामों पर भी बहस होगी और बचपन से पढ़ाया गया भारतीय इतिहास बदल दिया जाएगा।

अपने नजरिए से इतिहास पढ़ाती है सरकार

राजद सांसद सुधाकर सिंह ने कहा कि जो सरकार सत्ता में होती है, वह अपने नजरिए से इतिहास पढ़ाती है और इसमें कुछ नया नहीं है। उन्होंने कहा कि जब उनकी सरकार आएगी तो वह भी बदलाव करेगी। साथ ही, उन्होंने आरोप लगाया कि बच्चों को गलत पढ़ाया जा रहा है। सुधाकर सिंह ने धर्मेंद्र प्रधान पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जो शिक्षा मंत्री पेपर लीक जैसी समस्याओं को नहीं रोक पा रहा, वहां बेहतर पाठ्यक्रम की क्या उम्मीद की जा सकती है। (एजेंसी इनपुट के साथ)


  • Narayan Bhoi

    Narayan Bhoi is a veteran journalist with over 40 years of experience in print media. He has worked as a sub-editor in national print media and has also worked with the majority of news publishers in the state of Chhattisgarh. He is known for his unbiased reporting and integrity.

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