NEPAL FLOOD; बाढ़ के बाद अंतर्राष्ट्रीय दबाव के आगे झुका नेपाल, भारत-चीन समेत 4 देशों के एक्सपर्ट्स को दी एंट्री

 काठमांडू, नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने हिमालयी इलाकों की तस्वीर बदल दी है. जमा देने वाले पानी, कीचड़, पत्थरों और मलबे का ऐसा सैलाब आया कि कई गांव, सड़कें और पुल देखते ही देखते बह गए. गुरुवार को रेस्क्यू टीमें कीचड़ के बीच उतरकर लोगों की तलाश करती रहीं. अब तक 600 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि नेपाल और तिब्बत को मिलाकर 1,468 लोग लापता हैं. हालात अभी भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं. मलबे के कारण नदी का रास्ता रुक गया है और इसके पीछे पानी जमा हो रहा है. विशेषज्ञों को डर है कि यह पानी अचानक बाहर निकला तो एक और बड़ी बाढ़ आ सकती है. वहीं तिब्बत में भूकंप भी देखने को मिला है. जो नेपाल के तबाही वाले इलाके के करीब है.

नेपाल में 910 लोग लापता

नेपाल पुलिस के मुताबिक देश में अब तक 600 शव बरामद किए जा चुके हैं. नेपाल की आपदा एजेंसी के अनुसार 910 लोग अब भी लापता हैं. इनमें कम से कम 517 विदेशी नागरिक शामिल हैं. सीमा पार तिब्बत में चीन ने 3 लोगों की मौत की पुष्टि की है, जबकि कम से कम 558 लोग लापता बताए गए हैं. इनमें करीब 260 विदेशी नागरिक हैं. यानी दोनों देशों को मिलाकर लापता लोगों की संख्या 1,468 तक पहुंच गई है.

290 भारतीयों से संपर्क नहीं

इस आपदा में बड़ी संख्या में भारतीय भी फंसे हुए हैं. इनमें कई लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए तिब्बत गए थे. भारत के विदेश मंत्रालय के मुताबिक 84 भारतीय नागरिकों को बचा लिया गया है, लेकिन 290 भारतीयों से अभी संपर्क नहीं हो पाया है. उन्हें सुरक्षित तलाशने और उनकी जानकारी जुटाने की कोशिश जारी है. नेपाल के रास्ते कैलाश जाने वाले ट्रेकर्स और श्रद्धालु भी इस आपदा की चपेट में आए हैं.

आखिर इतनी बड़ी बाढ़ आई कैसे?

नेपाल और चीन के मुताबिक बुधवार को हिमालय में ग्लेशियर का एक बड़ा हिस्सा टूट गया. इसके बाद बर्फ, चट्टान, मिट्टी और पानी का भारी मलबा तेजी से नीचे की ओर बहने लगा. यह सैलाब हिमालयी नदी तंत्र में घुसा और रास्ते में आने वाले गांवों और ढांचों को अपने साथ बहाता चला गया. जिस इलाके में यह तबाही हुई, वहां से काठमांडू और ल्हासा को जोड़ने वाला रास्ता भी गुजरता है और यह ट्रेकर्स व श्रद्धालुओं के बीच काफी जाना-पहचाना मार्ग है.शुरुआत में माना गया था कि शायद भूकंप के कारण ग्लेशियर टूटा. लेकिन अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के मुताबिक जिस 4.4 तीव्रता के भूकंपीय संकेत को पहले भूकंप समझा गया था, वह वास्तव में ग्लेशियर की चट्टान और बर्फ टूटने से पैदा हुई ऊर्जा थी. इसके बाद मलबे का तेज बहाव आया.

बारिश ने बढ़ाई चिंता

हिमालयी इलाकों में आने वाले दिनों में बारिश का अनुमान भी खतरे को बढ़ा सकता है. जल विशेषज्ञों का कहना है कि अगर बारिश जारी रही तो पहले से जमा पानी और तेजी से बढ़ सकता है. यानी रेस्क्यू टीमें अभी उन लोगों को खोज रही हैं जो मलबे और बाढ़ में फंस गए हैं, लेकिन दूसरी तरफ उन्हें एक नए संभावित सैलाब का भी खतरा झेलना पड़ रहा है.

नेपाल ने बाढ़ बचाव में विदेशी मदद को दी मंजूरी

नेपाल सरकार ने बाढ़ और तबाही के बाद राहत-बचाव अभियान में विदेशी मदद लेने का फैसला किया है. पहले सरकार ने विदेशी टीमों की मदद लेने से इनकार किया था, लेकिन अब फैसला बदल दिया गया है. नेपाल के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन केंद्र के आकलन के बाद भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया को अपने विशेषज्ञ और तकनीकी टीमें भेजने की मंजूरी दी गई है.ये टीमें सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश और बचाव, साथ ही शवों की पहचान के लिए DNA और फॉरेंसिक जांच में मदद करेंगी. माना जा रहा है कि लापता विदेशी नागरिकों को लेकर कई देशों के दबाव के बाद नेपाल सरकार ने यह फैसला किया है.

 नेपाल में कुदरत का कहर! भारत ने भेजी राहत सामग्री की तीसरी खेप

तिब्बत सीमा से सटे इलाकों में आई विनाशकारी बाढ़ से बेहाल नेपाल की मदद के लिए भारत संकटमोचक बनकर सामने आया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नेपाली समकक्ष बालेन शाह को दिए गए भरोसे के बाद भारत ने शुक्रवार को 10 टन राहत सामग्री की तीसरी खेप काठमांडू रवाना कर दी. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जानकारी दी कि इस खेप में पोर्टेबल जनरेटर, खाद्य पैकेट, डिग्निटी किट और जल शोधन गोलियों के अलावा 11 डॉक्टरों व पैरामेडिक्स की विशेष मेडिकल टीम और सुरंग बचाव कार्यों के लिए एक टोही टीम भी भेजी गई है. इससे पहले भारत बुधवार को 10 टन और गुरुवार को 37.5 टन राहत सामग्री भेज चुका है. नेपाल में अब तक 547 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है और चारों तरफ भारी तबाही का मंजर है, ऐसे में भारत की यह त्वरित सहायता पड़ोसी देश के लिए संजीवनी साबित हो रही है.

 अमेरिका के 90 नागरिक लापता, US ने शुरू की राहत सामग्री की सप्लाई

नेपाल और चीन के सीमावर्ती इलाकों में आई विनाशकारी तबाही के बाद 90 अमेरिकी नागरिक अभी भी लापता हैं, जबकि 5 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है. अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट के अनुसार, फिलहाल किसी अमेरिकी नागरिक की मौत की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन दूरदराज के दुर्गम इलाकों के कारण राहत और खोज अभियान में भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. इस बीच, अमेरिका ने नेपाल के लिए 5 लाख डॉलर की आपातकालीन सहायता राशि और खाद्य सामग्री भेजने का ऐलान किया है, जिसकी पहली खेप रवाना कर दी गई है. इसके अलावा, ब्रिटेन ने 6.8 मिलियन डॉलर और यूरोपीय संघ ने 2.3 मिलियन डॉलर की मदद की घोषणा की है.

महाराष्ट्र के 395 लोग फंसे, नागपुर के 105 नागरिकों की सलामती से बड़ी राहत

नेपाल-तिब्बत सीमा पर मची इस खौफनाक तबाही के बीच महाराष्ट्र के कुल 395 लोग वहां बुरी तरह फंसे हुए हैं. गनीमत यह है कि इनमें से नागपुर के 105 लोगों समेत 325 नागरिकों से संपर्क हो चुका है और वे सुरक्षित हैं, जिन्हें काठमांडू से भारत लाने की प्रक्रिया युद्धस्तर पर जारी है. लेकिन असली डर और मातम इस बात का है कि तिब्बत के रिया-रियू इलाके में फंसे 60 लोगों और अन्य 10 नागरिकों से अब तक कोई संपर्क नहीं हो पाया है, जिससे उनके परिवारों की सांसे अटकी हुई हैं और हर कोई अपनों की सलामती की दुआ मांग रहा है.

बाढ़ से 93 हजार लोग प्रभावित, रेड क्रॉस ने दी चेतावनी

चीन और नेपाल की सीमा पर आई भयानक बाढ़ से कम से कम 93,000 लोग प्रभावित हुए हैं, जबकि हजारों घर पूरी तरह तबाह हो चुके हैं. रेड क्रॉस (IFRC) के नेपाल प्रतिनिधि डेविडे फिशर के अनुसार, आपदा के बाद हिमालय के सुदूर ग्रामीण इलाकों में फंसे पीड़ितों तक पहुंचने के लिए बचाव दल कड़ी मशक्कत कर रहे हैं. रेड क्रॉस ने राहत एजेंसियों से केवल तात्कालिक सहायता ही नहीं, बल्कि दीर्घकालिक पुनर्वास योजना बनाने की अपील की है ताकि प्रभावित लोगों को महीनों तक तंबुओं और तिरपाल के नीचे न रहना पड़े. खराब मौसम, लगातार हो रही बारिश और दोबारा बाढ़ ने रेस्क्यू ऑपरेशन को बेहद चुनौतीपूर्ण बना दिया है. वहीं संयुक्त राष्ट्र के आपदा जोखिम न्यूनीकरण प्रतिनिधि कमल किशोर ने कहा कि हाल के दशकों में ऐसी खतरनाक और अनोखी पर्वतीय आपदा नहीं देखी गई है, जिसे देखते हुए आने वाले दिनों में अत्यधिक सतर्कता बरतने की सख्त जरूरत है.

  • Narayan Bhoi

    Narayan Bhoi is a veteran journalist with over 40 years of experience in print media. He has worked as a sub-editor in national print media and has also worked with the majority of news publishers in the state of Chhattisgarh. He is known for his unbiased reporting and integrity.

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