
काठमांडू; नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने हिमालयी इलाकों की तस्वीर बदल दी है. जमा देने वाले पानी, कीचड़, पत्थरों और मलबे का ऐसा सैलाब आया कि कई गांव, सड़कें और पुल देखते ही देखते बह गए. गुरुवार को रेस्क्यू टीमें कीचड़ के बीच उतरकर लोगों की तलाश करती रहीं. अब तक 469 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि नेपाल और तिब्बत को मिलाकर 1,468 लोग लापता हैं. हालात अभी भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं. मलबे के कारण नदी का रास्ता रुक गया है और इसके पीछे पानी जमा हो रहा है. विशेषज्ञों को डर है कि यह पानी अचानक बाहर निकला तो एक और बड़ी बाढ़ आ सकती है. वहीं तिब्बत में भूकंप भी देखने को मिला है. जो नेपाल के तबाही वाले इलाके के करीब है.
नेपाल में 910 लोग लापता
नेपाल पुलिस के मुताबिक देश में अब तक 389 शव बरामद किए जा चुके हैं. नेपाल की आपदा एजेंसी के अनुसार 910 लोग अब भी लापता हैं. इनमें कम से कम 517 विदेशी नागरिक शामिल हैं. सीमा पार तिब्बत में चीन ने 3 लोगों की मौत की पुष्टि की है, जबकि कम से कम 558 लोग लापता बताए गए हैं. इनमें करीब 260 विदेशी नागरिक हैं. यानी दोनों देशों को मिलाकर लापता लोगों की संख्या 1,468 तक पहुंच गई है.
290 भारतीयों से संपर्क नहीं
इस आपदा में बड़ी संख्या में भारतीय भी फंसे हुए हैं. इनमें कई लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए तिब्बत गए थे. भारत के विदेश मंत्रालय के मुताबिक 84 भारतीय नागरिकों को बचा लिया गया है, लेकिन 290 भारतीयों से अभी संपर्क नहीं हो पाया है. उन्हें सुरक्षित तलाशने और उनकी जानकारी जुटाने की कोशिश जारी है. नेपाल के रास्ते कैलाश जाने वाले ट्रेकर्स और श्रद्धालु भी इस आपदा की चपेट में आए हैं.
आखिर इतनी बड़ी बाढ़ आई कैसे?
नेपाल और चीन के मुताबिक बुधवार को हिमालय में ग्लेशियर का एक बड़ा हिस्सा टूट गया. इसके बाद बर्फ, चट्टान, मिट्टी और पानी का भारी मलबा तेजी से नीचे की ओर बहने लगा. यह सैलाब हिमालयी नदी तंत्र में घुसा और रास्ते में आने वाले गांवों और ढांचों को अपने साथ बहाता चला गया. जिस इलाके में यह तबाही हुई, वहां से काठमांडू और ल्हासा को जोड़ने वाला रास्ता भी गुजरता है और यह ट्रेकर्स व श्रद्धालुओं के बीच काफी जाना-पहचाना मार्ग है.
शुरुआत में माना गया था कि शायद भूकंप के कारण ग्लेशियर टूटा. लेकिन अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के मुताबिक जिस 4.4 तीव्रता के भूकंपीय संकेत को पहले भूकंप समझा गया था, वह वास्तव में ग्लेशियर की चट्टान और बर्फ टूटने से पैदा हुई ऊर्जा थी. इसके बाद मलबे का तेज बहाव आया.
बारिश ने बढ़ाई चिंता
हिमालयी इलाकों में आने वाले दिनों में बारिश का अनुमान भी खतरे को बढ़ा सकता है. जल विशेषज्ञों का कहना है कि अगर बारिश जारी रही तो पहले से जमा पानी और तेजी से बढ़ सकता है. यानी रेस्क्यू टीमें अभी उन लोगों को खोज रही हैं जो मलबे और बाढ़ में फंस गए हैं, लेकिन दूसरी तरफ उन्हें एक नए संभावित सैलाब का भी खतरा झेलना पड़ रहा है.
नेपाल के PM और मंत्री एक महीने की सैलरी आपदा राहत कोष में देंगे
नेपाल बाढ़ लाइव: नेपाल के प्रधानमंत्री और मंत्रियों ने बाढ़ से प्रभावित लोगों की मदद के लिए अपनी एक महीने की सैलरी आपदा राहत कोष में जमा करने का फैसला किया है. यह कदम विनाशकारी बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान के बीच उठाया गया है.





