
नईदिल्ली, ई20 पेट्रोल (20 फीसदी इथेनॉल मिश्रित) को लेकर हाल ही में ऑटोमोबाइल सेक्टर और सरकार के बीच बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सोसाइटी ऑफ ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (SIAM) के लीक हुए आंकड़ों और न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की जांच में देश के कई राज्यों में E20 पेट्रोल में खतरनाक स्तर पर क्लोराइड और पानी की मिलावट पाई गई है, जिससे वाहनों के इंजनों और फ्यूल इंजेक्टरों के जल्दी खराब होने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। बढ़ती शिकायतों और कंस्यूमर कोर्ट के सख्त रुख के बीच पेट्रोलियम मंत्रालय ने कड़ा कदम उठाते हुए गुणवत्ता मानकों की अनदेखी करने वाले देश भर के 2573 पेट्रोल पंपों पर तेल की बिक्री रोक दी है। सरकार इस राष्ट्रव्यापी क्वॉलिटी-कंट्रोल ड्राइव और भूमिगत टैंकों की कड़ी जांच के जरिये ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन में उपभोक्ताओं का भरोसा बहाल करने में जुटी है।
ओएमसी की कार्रवाई और पेट्रोल पंपों पर लगने लगे ताले
- ऑटोकार इंडिया की रिपोर्ट की मानें तो सरकार की इस क्वॉलिटी कंट्रोल ड्राइव के तहत सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने भारी मात्रा में कार्रवाई की है।
- रिपोर्ट के अनुसार, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOCL) के सबसे ज्यादा 1257 पंपों पर बिक्री रोकी गई है, इसके बाद हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) के 915 और भारत पेट्रोलियम (BPCL) के 401 पंप शामिल हैं।
- सप्लाई चेन से पानी और अशुद्धियों को हटाने के लिए अब भूमिगत टैंकों की वाटर-इन्ग्रेश टेस्टिंग दिन में 8 से 12 बार अनिवार्य कर दी गई है, जो देशभर के लगभग 88,995 डीलरों के यहां लागू है।
क्लोराइड और पानी की मिलावट का खुलासा
- बता दें कि यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ, जब SIAM के लीक हुए लेटर्स और रॉयटर्स की एक जांच में देश के 18 राज्यों में खतरनाक स्तर पर क्लोराइड और पानी की मिलावट का खुलासा हुआ।
- सरकार की निर्धारित 3 मिलीग्राम/किलोग्राम (ppm) की सीमा के मुकाबले राजस्थान में क्लोराइड का स्तर 570 पीपीएम और मध्य प्रदेश में 550 पीपीएम तक दर्ज किया गया।
- इसके अलावा उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश में पानी की मात्रा भी तय सीमा से चार गुना अधिक पाई गई, जिससे आधुनिक वाहनों के फ्यूल इंजेक्टर और इंजन को भारी नुकसान की आशंका पैदा हो गई है।
ऑटोमोबाइल कंपनियों की चिंताएं और कानूनी चुनौतियां
बता दें कि E20 के अनिवार्य होने के बाद से वाहन चालकों को कम माइलेज और इंजन खराब होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। रायपुर की एक उपभोक्ता अदालत द्वारा मारुति सुजुकी को एक ग्राहक की गाड़ी बदलने का निर्देश देना इस बात का प्रमाण है कि कार निर्माताओं पर वॉरंटी और कानूनी दबाव बढ़ रहा है। मारुति, टाटा और महिंद्रा जैसी प्रमुख कंपनियों ने इंटर्नल टेस्टिंग में गंभीर मिलावट पाया था, हालांकि अब सरकार और ओएमसी कड़े परीक्षणों के जरिये इस समस्या पर लगाम कसने में जुटे हैं।
नए BIS स्टैंडर्ड तैयार करना बेहद जरूरी
- एक्सपर्ट्स का मानना है कि E20 पेट्रोल में अकार्बनिक क्लोराइड के लिए मौजूदा समय में कोई औपचारिक रूप से अनिवार्य वैधानिक मानक (BIS standards) नहीं हैं, हालांकि पेट्रोलियम मंत्रालय आंतरिक रूप से 3 पीपीएम की सीमा तय करता है।
- वाहनों के इंजनों को सुरक्षित रखने के लिए क्लोराइड की सीमा को कड़ाई से लागू करने वाले नए BIS स्टैंडर्ड तैयार करना बेहद जरूरी हो गया है। सरकार की यह ताजा सख्ती दर्शाती है कि देश के हरित ऊर्जा संक्रमण में उपभोक्ताओं का भरोसा बनाए रखना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।







