
नईदिल्ली, देशभर में इन दिनों मंदिरों में चढ़ाए जाने वाले चंदे को लेकर हर किसी की नजर आ है. कई मामले सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुके हैं. इन्हीं में वृंदावन के प्रसिद्ध श्री बांके बिहारी मंदिर भी शामिल है, जिसकों लेकर सुप्रीम कोर्ट कड़ी टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा कि मंदिर में आने वाला हर दान सबसे पहले भगवान के खाते में जमा होना चाहिए. इसके बाद ही किसी सेवायत या अन्य व्यक्ति को नियमों के अनुसार उसका हिस्सा मिल सकता है.
कोर्ट ने कमेटी को इसके लिए एक उचित व्यवस्था बनाने का निर्देश दिया है. इसके तहत मंदिर में आने वाले दान की रकम का पूरा हिसाब रखा जाए. इसमें किसी तरह की गड़बड़ी या हेराफेरी की गुंजाइश न रहे.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर के चढ़ावे की पूरी व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के निर्देश दिए है. कोर्ट ने कहा कि श्रद्धालुओं द्वारा दिया जाने वाला पैसा सीधे मंदिर के तय दानपात्र में डाला जाए. इसके बाद ऑनलाइन माध्यम से मंदिर के कोष में जमा किया जाए. यह मामला मंदिर के चढ़ावे में गड़बड़ी और धन के गलत इस्तेमाल के आरोपों से जुड़ा है. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साफ कहा कि कोई भी व्यक्ति श्रद्धालु से मिला दान पहले अपने पास नहीं रख सकता है. सबसे पहले यह धन भगवान को समर्पित माना जाएगा. उसका पूरा हिसाब मंदिर के रिकॉर्ड में दर्ज होना चाहिए.
खरीदारी पर भी कोर्ट की टिप्पणी
कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर मंदिर के धन से कोई संपत्ति खरीदने का प्रस्ताव आता है, तो सौदा पूरा होने से पहले इसकी जानकारी सुप्रीम कोर्ट को दी जाएगी. यानी मंदिर के पैसे से संपत्ति खरीदने का फैसला अदालत की जानकारी और अनुमति के बिना आगे नहीं बढ़ाया जा सकेगा. इन निर्देशों का उद्देश्य मंदिर के दान और चढ़ावे के प्रबंधन में पारदर्शिता लाना और किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकना है.







