
भारतीय महिला हॉकी टीम ने इस बार के विश्व कप में भले ही पहले चार स्थान पर नहीं रह पाई लेकिन अपने प्रतिद्वंदियों के खिलाफ जिस तरीके से आक्रमण और सुरक्षा का खेल खेला उसकी बहुत तारीफ हो रही है और होना भी चाहिए। पूरे स्पर्धा में भारतीय महिला हॉकी टीम को कोई भी पराजित नहीं कर सकी।
पांचवे स्थान के लिए जर्मनी जैसी मजबूत टीम के खिलाफ महिलाओं ने तीसरे क्वार्टर में जो खेल दिखाया उसे देख यही लग रहा था कि इस खेल का दस फीसदी खेल ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दिखा देते तो सेमीफाइनल खेल रहे होते। नवनीत कौर और इशिता ने तीसरे क्वार्टर में जर्मनी रक्षा पंक्ति को तहस नहस करते हुए तीन मिनट में तीन गोल दाग दिए। नवनीत कौर ने अपने बारह साल के अनुभव को झोंक कर रख दिया जिसके चलते पेनल्टी कार्नर और फील्ड गोल कर ये सिद्ध कर दिया कि वे क्यों महत्वपूर्ण खिलाड़ी है।
विश्व में 140 देश महिला हॉकी खेलते है इनमें पांचवे स्थान पर आना सचमुच मायने रखता है। हॉकी में पश्चिमी देशों के वर्चस्व को इंकार नहीं किया जा सकता है। वे हर हमेशा नयी तकनीक के साथ खेलने आते है। हिंदुस्तान में भी बेहतर सुविधा मिल रही है और इसका परिणाम भी देखने को मिल रहा है। इसके लिए उड़ीसा के भूतपूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक आज भी बधाई के हकदार है जिनके प्रयास से देश हॉकी में अपनी उपस्थिति दिखा तो पा रहा है।
सलमा टेटे की कप्तानी में भारत को विश्वकप हॉकी में सालों बाद पांचवा क्रम मिला है। अगले महीने एशियाई खेलों में उम्मीद की जा सकती है कि भारत विजेता बनकर सामने आएगी।भारत सरकार ने इस साल किसी भी खिलाड़ी को खेल रत्न नहीं माना है।नवनीत कौर इस रत्न की सबसे शसक्त उम्मीदवार है। मौका भी है, दस्तूर भी है।
स्तंभकार- संजयदुबे







