GAME; ध्यान चंद ‘भारत रत्न’ क्यों नहीं है?

आज 29 अगस्त  के दिन हर साल मैं भारत रत्न पुरस्कार विजेताओं की सूची को देखता हूं। 1979 से  इस सूची को देखने की आदत पड़ी है।
1954 से देश के लिए सबसे अधिक उत्कृष्ट सेवा करने वाले ऐसे व्यक्ति जो  समाज सेवा, कला, विज्ञान, आर्थिक, सांस्कृतिक क्षेत्र में अनुकरणीय हो ,ये पुरस्कार दिया जाता है। हमारे देश में राष्ट्रपति,उप राष्ट्रपति ,प्रधानमंत्री, मंत्री, मुख्यमंत्री गण ही विशिष्ट समाज सेवक माने जाते है। इस कारण 06 राष्ट्रपति,09 प्रधानमंत्री 03केंद्रीय मंत्री और 06 मुख्यमंत्री भारत रत्न है। 53 में से 25 व्यक्ति राजनीति से सरोकार रखते है।47%  भारत रत्न  राजनीतिज्ञ है।
53 व्यक्तियों में से 20 व्यक्तियों को मरणोपरांत भारत रत्न मिला है। इनमें   तीन एक प्रधान मंत्री, चार केंद्रीय मंत्री, और तीन मुख्यमंत्री है।50 फीसदी मरणोपरांत भारत रत्न राजनीति से सरोकार रखने वाले व्यक्ति ही पाए है।आप निष्कर्ष निकाल सकते है कि  भारतीय संविधान में  सर्वोच्च संवैधानिक पद वाले  व्यक्ति ही अधिकृत रूप से समाजसेवी है।
आपका प्रश्न हो सकता है कि ध्यानचंद के जन्मदिन के दिन गड़े मुर्दे क्यों उखाड़े जा रहे है?
दरअसल इस देश में भारत रत्न किसे माना जाए और क्यों माना जाए? इसका भले ही पुरस्कार समिति ने मापदंड निर्धारित किया है।इन मापदंडों में एक ये भी था केवल जीवित व्यक्तियों को ही भारत रत्न पुरस्कार दिया जाएगा।1966 में लाल बहादुर शास्त्री को मरणोपरांत भारत रत्न देने के साथ ही नई परम्परा की शुरुवात हुई।अब तक 20 व्यक्तियों को मरने के बाद भारत रत्न पुरस्कार दिया गया है।
एक  नज़र इन व्यक्तियों पर डाल लीजिए। मदन मोहन मालवीय की मृत्यु 1946 में हो गई थी उनके मृत्यु के 69 साल बाद भारत रत्न पुरस्कार दिया गया।आसाम के मुख्य मंत्री गोपी नाथ बोरदोलोई की मृत्यु  1950 में हो गई थी।उनके मृत्यु के 49 साल बाद उन्हें भारत रत्न पुरस्कार दिया गया।भीम राव अंबेडकर की मृत्यु 1956 में हुई थी। उनके मृत्यु के 44 साल बाद भारत रत्न पुरस्कार दिया गया। चौधरी चरण सिंह  की मृत्यु 1884 में हो गई थी उनको 40 साल बाद पुरस्कार के लायक माना गया। बिहार के मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर की मृत्यु 1988 में हो गई थी उनको 2024 याने 36 साल बाद भारत रत्न के योग्य माने गए।
ध्यानचंद 1905 से 1979 तक जीवित थे।
जब तक ध्यान चंद जीवित थे, उन्हें भारत रत्न इस कारण नहीं दिया गया क्योंकि भारत रत्न के लिए अनिवार्य मापदंड में खेल श्रेणी नहीं था। सो ध्यानचंद, भारत रत्न नहीं बने।
2014 में भारत रत्न देने के लिए एक व्यक्ति अचनक ही योग्य माना गया।ये व्यक्ति है क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले खिलाड़ी – सचिन तेंदुलकर? दो सौ टेस्ट ,सौ शतक, विश्व में सर्वाधिक रन और न जाने क्या रिकॉर्ड है उनके नाम है। चूंकि सचिन तेंदुलकर संन्यास लेने वाले थे इस कारण  प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह जी को मुंबई के स्टेडियम से राहुल गांधी का फ़रमान गया। सचिन तेंदुलकर भारत रत्न होंगे। भारत रत्न चयन समिति की न बैठक हुई और न ही अधिकृत संशोधन हुआ ।कह दिया सो घोषणा हो गई।
प्रश्न ये सारगत है कि ओलंपिक खेल में भारत को तीन बार गोल्ड मेडल दिलाने वाले और देश में हॉकी को स्थापित करने वाले ध्यानचंद सचमुच भारत रत्न के लिए योग्य नहीं है या इस देश की सरकारे  की इक्छा शक्ति कमजोर है?
राजनीति के बिसात पर  ध्यान चंद किसी राजनैतिक दल या विचारधारा से  इत्तफाक  नहीं रखते थे। उनका निर्दलीय होना उनके भारत रत्न न पाने के लिए एक कारण बन गया, ऐसा मेरा मानना है।
भारत रत्न, दिए जाने का कारण विशुद्ध मापदंड होता तो शायद ध्यान चंद के लिए भारत रत्न की मांग नहीं की जाती लेकिन  दलीय स्वार्थ या राजनैतिक  तुष्टिकरण के लिए भारत रत्न  बाँटे जाए तो फिर ध्यान चंद के लिए भारत रत्न की भीख भी माँगा जाना अनुचित नहीं लगता है।
  2021 में एक नए प्रकार की राजनीति  से हमें दो चार होना पड़ा।खेल के क्षेत्र में असाधारण और उत्कृष्ट  प्रदर्शन करने वालो के लिए खेल रत्न  पुरस्कार की घोषणा 1991 में हुई।ये पुरस्कार  भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नाम पर शुरू हुआ था।2021 में राजीव गांधी का नाम हटाकर ध्यान चंद के नाम से ये पुरस्कार संशोधित हो गया । ध्यानचंद के नाम पर पुरस्कार  की घोषणा हो गई लेकिन ध्यान चंद उपेक्षित ही रहे। भारत रत्न पुरस्कार की श्रेणी में खेल को शामिल किए जाने के बारह साल बाद भी ध्यान चंद भारत रत्न “नहीं” है। राज्यों के चुनाव को मद्देनजर अनेक व्यक्ति मरणोपरांत भारत रत्न बने है।उत्तर प्रदेश का चुनाव आसन्न है।मौका भी है दस्तूर भी है, झांसी के इस महान खिलाड़ी पर ध्यान दिया जा सकता है।
संजय दुबे 

  • Narayan Bhoi

    Narayan Bhoi is a veteran journalist with over 40 years of experience in print media. He has worked as a sub-editor in national print media and has also worked with the majority of news publishers in the state of Chhattisgarh. He is known for his unbiased reporting and integrity.

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