
काठमांडू, भारत के पड़ोसी देश नेपाल ने एक बार फिर से बुधवार को ऐतिहासिक विनाश देखा है. यहां बड़ी संख्या में लोग चीन के तिब्बत क्षेत्र से भोटेकोशी नदी में आई अचानक बाढ़ में बह गए.नेपाल और चीन के सीमावर्ती इलाकों में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के कारण मौतों का आंकड़ा बढ़कर 362 तक पहुंच गया है, नेपाल में फंसे हुए 288 भारतीयों से संपर्क नहीं हो पा रहा है. इसमें से पहला ग्रुप त्रिशूली पावर प्रॉजेक्ट में काम कर रहे लोगों का है, जिसें 73 लोग शामिल हैं, जबकि दूसरा ग्रुप 33 भारतीयों का केरल से था, जिनसे संपर्क नहीं हुआ है. जबकि मलबे से नए शव बरामद होने का सिलसिला लगातार जारी है हजारों लोग लापता हैं.
इस प्राकृतिक आपदा में कई देशों के लोग लापता है. गायब हो गए लोगों की तलाश जारी है और अब तक 100 भारतीयों को खोज भी लिया गया है. बाढ़ इतनी भयानक थी कि पुल टूट गए, कई घरों को नुकसान पहुंचा और कई हाइड्रोप्रोजेक्ट तबाह हो गए. नेपाल-तिब्बत सीमा के पास पानी का स्तर अचानक बढ़ने से भोटे कोशी नदी में तेज बाढ़ आई.

बाढ़ का सबसे ज्यादा असर नेपाल के रसुवा और धादिंग जिलों में देखा गया. इसके अलावा नुवाकोट, चितवन और नवलपरासी ईस्ट समेत कई अन्य जिले भी प्रभावित हुए हैं. तेज पानी और भूस्खलन के कारण सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हो गए हैं. लापता लोगों की तलाश के लिए राहत और बचाव दलों को भेजा गया है. अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर रख रहे हैं और प्रभावित क्षेत्रों में बचाव कार्य जारी है. सरकार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और राहत सामग्री उपलब्ध कराने में जुटी है.
1000 लोगों के बहने की आशंका
कल तिब्बत की ओर से अचानक आई बाढ़ के कारण रसुवा जिले के टिमुरे बाजार में हालात खराब हो गए हैं. इसके साथ ही बड़े स्तर पर नुकसान की आशंका जताई गई है. इस तबाही के मंजर में 1000 लोगों के बहने की आशंका है। हालांकि, अभी आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है. रसुवा में बाढ़ और संभावित खतरे को देखते हुए काठमांडू उपत्यका ट्रैफिक पुलिस ने काठमांडू से रसुवा, नुवाकोट, चितवन और धादिङ जाने वाले वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है.
वाहन और सामान बह गए
रसुवा जिले में अचानक आई बाढ़ के कारण हालात इस समय काफी खराब बने हुए हैं. तेज बहाव में लोगों के वाहन और सामान बह गए, जबकि एक पुल भी टूट गया है. जिला पुलिस कार्यालय रसुवा के अनुसार, बुधवार सुबह करीब 9 बजे अचानक आई. फिलहाल लोगों की तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है.
291 विदेशी पर्यटकों का अब तक पता नहीं
नेपाल के पर्यटन विभाग ने हादसे पर बयान जारी किया है, जिसमें बताया गया कि 291 विदेशी पर्यटकों का अब तक पता नहीं चल पाया है. इनमें 105 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं. इसके अलावा टिमुरे बॉर्डर पोस्ट पर तैनात 9 पुलिसकर्मी भी लापता बताए जा रहे हैं. दूसरी तरफ भारत के बिहार राज्य में प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है. अचानक आई बाढ़ ने नदी किनारे चल रही बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को भी प्रभावित किया है. अधिकारियों को कई प्रोजेक्ट साइट्स के बह जाने की रिपोर्ट मिली है.
नेपाल की बाढ़ में 300 भारतीय लापता, 165 लोगों की मौत, रेस्क्यू जारी
नेपाल में 26 अगस्त को आए विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बाद नेपाल के दूतावास ने भारत सरकार और भारतीय जनता का आभार जताया है. दूतावास ने कहा कि इस आपदा में करीब 165 लोगों की मौत हुई है, बड़ी संख्या में लोग घायल और बेघर हुए हैं, जबकि कई लोग अभी भी लापता हैं. नेपाल सरकार सेना, पुलिस और अन्य एजेंसियों के साथ लगातार राहत और बचाव अभियान चला रही है. करीब 300 भारतीयों के भी लापता होने की पुष्टि नेपाली विदेश मंत्री ने की है.
पीएम बालने शाह ने दिए आदेश
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने राहत बचाव के लिए सेना को तैनात करने का आदेश दिया है. फिलहाल आपदा प्रबंधन एजेंसी के साथ मेडिकल टीमें, स्काउट्स और रेड क्रॉस की टीमें मिलकर काम कर रही हैं. फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती दुर्गम पहाड़ी इलाका और तेज बहाव है, जिसके कारण उन इलाकों तक पहुंचने में भारी समस्या का सामना करना पड़ रहा है.
कई पुलिसकर्मी लापता
रसुवा जिले के स्याफ्रुबेसी और तिमुरे इलाके सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं.फिलहाल नुकसान का सटीक आकलन नहीं हो पाया है. शुरुआती जानकारी के अनुसार कई जवान भी लापता बताए जा रहे हैं. पुलिस की मानें तो 28 सुरक्षाकर्मियों से संपर्क नहीं हो पा रहा है. ज्यादा चांस हैं कि वह इस बाढ़ में बह गए हों. इनमें 19 नेपाल पुलिस और 9 आर्म्ड पुलिस फोर्स के जवान शामिल हैं.
13,000 से ज्यादा सुरक्षाबल मैदान में उतरे, 570 से अधिक लोगों का रेस्क्यू
नेपाल में विनाशकारी बाढ़ से उपजे हालात के बीच राहत और बचाव कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए 13,295 सुरक्षाकर्मियों की विशाल टीम को मैदान में उतार दिया गया है. प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने सोशल मीडिया के जरिए जानकारी साझा करते हुए बताया कि रेस्क्यू ऑपरेशन को गति देने के लिए नेपाल पुलिस के 7,250, नेपाल सेना के 4,200 और सशस्त्र पुलिस बल के 1,845 जवानों को तैनात किया गया है. उन्होंने बताया कि 69 हवाई उड़ानों के माध्यम से 570 से अधिक प्रभावित लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है, जबकि अतिरिक्त हेलीकॉप्टरों को स्टैंडबाय पर रखने के साथ-साथ निजी हेलीकॉप्टरों को भी सरकारी कमान और समन्वय प्रणाली के तहत तैनात किया गया है. रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग जैसे बेहद प्रभावित इलाकों में फंसे नागरिकों और सुरक्षाकर्मियों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने का काम जारी है. इसके अलावा लगभग 3,500 लोगों के त्वरित पुनर्वास के लिए स्कूलों, सार्वजनिक स्थलों और सामुदायिक भवनों में अस्थायी आवास की व्यवस्था की गई है.
तिब्बत में 558 लोग अब भी लापता
नेपाल सीमा से सटे चीन स्वायत्त क्षेत्र तिब्बत के गिरोंग काउंटी में आई भयानक बाढ़ और भूस्खलन से हाहाकार मच गया है, जहां हालात का जायजा लेने खुद चीनी प्रधानमंत्री ली कियांग गुरुवार को प्रभावित इलाकों में पहुंचे. सरकारी मीडिया शिन्हुआ के मुताबिक, सीमावर्ती इलाकों में तबाही के बाद अकेले तिब्बत में 558 लोग लापता बताए जा रहे हैं, जबकि 3 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है. बाढ़ के कारण बने मलबे के भारी टीले और ऊपरी इलाके में एक बड़ी कृत्रिम झील बन जाने से बचाव कार्यों में गंभीर अड़चनें आ रही हैं, जिससे अधिकारियों को एक और बड़ी सेकेंडरी आपदा का खतरा सता रहा है. इस खतरे से निपटने के लिए सरकारी इंजीनियरिंग कंपनी ‘चीन एन्नेंग’ की 8 सदस्यीय विशेष अग्रिम टीम उन्नत संचार और डिटेक्शन उपकरणों के साथ मौके पर पहुंच चुकी है.






