
रायपुर, नेपाल में आई विनाशकारी से पूरी दुनिया वाकिफ है. इस आपदा में नेपाल में अब तक 734 लोगों की मौत हो चुकी है. अब भी 2500 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं, इनमें बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक भी शामिल हैं. वहीं, कई लोग सुरक्षित भी बचाए गए हैं. पर कई लोगों को उनकी किस्मत ने बचाया है. दरअसल बाढ़ के बीच रायपुर के 5 दोस्त शनिवार को घर लौट आए जो कि नेपाल में बाढ के करीब जा रहे थे.
बता दें कि माना कैंप निवासी दिनेश सिंह ठाकुर, दिनेश ओझा, प्रेम सिंह जगत, नारायण सेन और यतेंद्र प्रकाश 21 अगस्त को धार्मिक यात्रा के लिए नेपाल रवाना हुए थे. दोस्तों ने बताया कि रेलवे स्टेशन से बाहर निकलते ही उन्होंने धरती को दंडवत प्रणाम किया और मातृभूमि की मिट्टी को माथे से लगाया. उन्होंने कहा कि ऐसा लगा जैसे नेपाल से दूसरी जिंदगी लेकर लौटे हैं.

छोटे से ब्रेक ने बचाई जिंदगी
दोस्तों ने बताया कि चाय पीने के लिए लिया गया छोटा सा ब्रेक उनके लिए जीवनदायी साबित हुआ. उन्होंने बताया नेपाल की भोटे कोशी और त्रिशूली नदी में आई अचानक बाढ़ के दौरान अगर वे कुछ मिनट पहले वहां से निकल गए होते, तो शायद तेज बहाव की चपेट में आ जाते.दोस्तों ने बताया कि वे लोग मुक्तिनाथ से पोखरा होते हुए लौट रहे थे. सुबह करीब 9:30 बजे धड़िंग जिले के मलेखू कस्बे में उन्हें चाय पीने का मन हुआ. होटल देखकर उन्होंने गाड़ी रोक दी. और चाय पीने में दोस्तों को करीब 10-15 मिनट लग गए. इस दौरान दूसरी घाटियों का पानी तेजी से बढ़ने लगा. मुताबिक, अगर वे कुछ मिनट पहले वहां से निकल गए होते तो शायद बाढ़ की चपेट में आ जाते.
एक दोस्त ने बताया कि थोड़ी देर बाद उन्हें आगे पुल बह जाने की जानकारी मिली. इसके बाद उन्होंने अपनी आंखों से त्रिशूली नदी का रौद्र रूप देखा. तेज बहाव में कारें, सामान और अन्य चीजें बह रही थीं कई जगह पानी का स्तर तेजी से बढ़ रहा था. बताते चलें, नेपाल में बुधवार 26 अगस्त को आई बाढ़ के बाद ही हालात खराब बने हुए हैं. इस आपदा में नेपाल में अब तक 734 लोगों की मौत हो चुकी है अब भोटेकोशी नदी को लेकर नई चिंता सामने आई है. नेपाल में अलग-अलग हाइड्रोपावर प्रोजोक्ट्स में काम करने वाले करीब 898 कर्मचारी अब भी लापता हैं. इनमें से करीब 361 कर्मचारियों को अब तक बचाया जा चुका है. फंसे हुए लोगों को बाहर निकालने के लिए सेना की तरफ से ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं.







