
भोपाल, भारतीय सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित बयान देने वाले प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह के खिलाफ केस दर्ज करने और उसे चलाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार अनुमति नहीं दगी. सूत्रों के अनुसार, मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा की गई. चर्चा के बाद सरकार ने शाह के पक्ष में अपना निर्णय लिया. बताया जा रहा है कि इससे पहले कैबिनेट से सभी अधिकारियों को बाहर कर दिया गया था.
सूत्र बताते हैं कि इस फैसले को लेने से पहले तर्क दिया गया है कि मंत्री तीन बार इस पूरे मामले में सार्वजनिक तौर पर माफी मांग चुके हैं. जिसके बाद अब कैबिनेट के इस फैसले को राज्यपाल के पास भेजा जाएगा. इसके बाद राज्यपाल के स्तर पर इस मामले में अंतिम निर्णय लिया जाएगा. हालांकि इस केस की 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है.
सरकार ने नहीं दी आधिकारिक जानकारी
बैठक के बाद मंत्री राकेश सिंह ने कैबिनेट द्वारा लिए गए फैसलों की जानकारी साझा की. हालांकि उन्होंने सरकार की तरफ से इसको लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है. मंत्री ने बैठक की ब्रीफिंग में इसे सरकार का किसी भी प्रकार का एजेंडा होने से इनकार कर दिया.
राज्यपाल का अंतिम निर्णय
जानकारी के मुताबिक, कैबिनेट की बैठक में यह भी चर्चा हुई है कि कर्नल सोफिया को लेकर विजय शाह द्वारा दिए गए बयान के बाद एसआईटी की रिपोर्ट आने तक उन्होंने लगभग 22 बार माफी मांग ली है. इसमें 4 सार्वजनिक मंर्चों से भी माफी मांगी गई हैं. सूत्रों के अनुसार, कैबिनेट बैठक के बाद अब इस पूरे मामले में अंतिम निर्णय के लिए राज्यपाल को प्रस्ताव भेजा गया है.
क्या है पूरा मामला
मध्य प्रदेश कैबिनेट में मंत्री विजय शाह के खिलाफ चल रहा यह मामला मई 2025 का है. महू में आयोजित एक कार्यक्रम में कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर मंत्री ने एक विवादित टिप्पणी कर दी थी, जिसके बाद विवाद खड़ा हो गया. इस पूरे मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया था और मंत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे. मामले के तूल पकड़ने पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई.
इस पूरे मामले में एसआईटी ने जांच को पूरी करने के लिए शाह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 196 के तहत मुकदमा चलाने की अनुमति मांगी थी. जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 19 जनवरी 2026 को राज्य सरकार को इस पर निर्णय लेने को कहा गया था. इसके बाद सरकार की तरफ से हो रही देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई थी और चार सप्ताह में फैसला लेने के निर्देश दिए थे. अब इस मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त को होनी है.







